उत्तराखंड टूरिस्ट प्लेस गाइड | Uttarakhand Tourism Places Guide

उत्तराखंड भारत का एक प्रमुख पर्यटक और दर्शनीय स्थल है हां पर प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में लोग घूमने के लिए आते हैं इसके अलावा उत्तराखंड धार्मिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण स्थल है यहां का केदारनाथ बद्रीनाथ हिंदू धर्म की आस्था का प्रतीक है उत्तराखंड भारत का ऐसा राज्य है जहां पर उचे उचे पर्वत श्रृंखला है नदिया झरना और इसकी खूबसूरत वादियां देखकर आपको लगेगा कि आप स्वर्ग में आ गए हैं सर्दी के दिनों में यहां पर बर्फबारी भी होती है जिसका नजारा ही कुछ और होता है ऐसे में अगर आप अपने परिवार के साथ घूमने का मन बना रहे हैं तो आप उत्तराखंड जा सकते हैं अब आपके मन में सवाल लगा कि उत्तराखंड में घूमने लायक कौन कौन सी जगह है अगर आप इसके बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं तो कोई बात नहीं है क्योंकि मैं आज आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताऊंगा कि Top tourist places in Uttarakhand in Hindi

Top tourist places in Uttarakhand in Hindi | Uttarakhand Tourist Places

उत्तराखंड में घूमने लायक टॉप tourist places लिखित प्रकार के हैं जिसका विवरण हम आपको नीचे बिंदु अनुसार देंगे जो इस प्रकार है आइए जाने

Tourist places of Uttarakhand Devprayag

देवप्रयाग ऋषिकेश से लगभग 75-80 km की दूरी पर स्थित एक मशहूर पर्यटक स्थल है I

उत्तराखंड में पांच प्रयाग पाए जाते हैं लेकिन इनमें से सबसे प्रमुख देवप्रयाग है नदियों के संगम को ही प्रयाग कहते हैं प्रयाग के कारण गंगा नदी का नाम गंगा पड़ा हिंदू धर्म के श्रद्धालुओं की आस्था यहां से जुड़ी हुई है और लाखों की संख्या में हिंदू धर्म के मानने वाले लोग यहां पर आकर गंगा स्नान करते हैं देवप्रयाग में अनेकों प्रकार के पर्यटक स्थल घूमने लायक हैं जैसे – दशरथशिला, चन्द्रबदनी मंदिर, रघुनाथजी मंदिर और सस्पेंशन ब्रिज हैं अगर आप एडवेंचर के बहुत ज्यादा शौकीन है तो यहां पर एडवेंचर से जुड़े हुए खेल रिवर राफ्टिंग और कैंपिंग का लुफ्त उठा सकते हैं।

Tourist places of Uttarakhand Auli | Auli Uttarakhand

अगर आप ऊंचा खंड घूमने के लिए जा रहे हैं तो आप वहां के प्रमुख पर्यटक स्थलऔली जाना ना भूलें इससे भारत का स्विट्जरलैंड कहा जाता है I यहां पर जब आप जाएंगे तो आपको लगेगा आप स्वर्ग में आ गए हैं I स्की रिसोर्ट आइस एडवेंचर के लिए Auli काफी मशहूर है प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में विदेशी सैलानी यहां पर इसका लुफ्त उठाने के लिए आते हैं I सर्दी के के समय यहां पर पहाड़िया वर्षों से ढकी हुई हो जाती है यहां पर आप जब घूमने के लिए जाएंगे तो आपको लगेगा कि आप कोई विदेशी पर्यटक स्थल पर आ गए हैं इसका मनमोहक दृश्य आपके दिलो-दिमाग पर इस कदर छा जाएगा उसे भूल पाना आपके लिए समय नहीं होगा I

हर साल देश-विदेश से लोग Skiing, Trekking, Camping, Ropeway ride का आनंद लेने यहाँ आते हैं। सर्दियों के मौसम औली की बर्फीली पहाड़ियों और नदियों की खूबसूरती देख आप भौचक्के से हो जायेंगे, यहाँ आकर हर कोई यही कहता है कि हम विदेश आ गए है। सर्दियों के अलावा औली गर्मी के मौसम में यहाँ की हरियालियों का मनोरम दृश्य किसी भी पर्यटकों के दिलों दिमाग में छाप छोड़ जाता हैं। वैसे तो औली की प्रकृति बेहद करीब से निहारने साल में कभी भी आ सकते है। औली आपको हर तरह से आनंद प्रदान करेगी।

Tourist places Uttarakhand Kedarnath | Uttarakhand Kedarnath

उत्तराखंड में स्थित केदारनाथ भारत का प्रमुख धार्मिक स्थल है हिंदू धर्म की आस्था का प्रतीक किसे माना जाता है और प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में है दूसरा डालो यहां पर बाबा केदारनाथ का दर्शन करने के लिए आते हैं केदारनाथ धार्मिक स्थल इसलिए भी बहुत ज्यादा प्रचलित है क्योंकि आज चारों धामों में से एक धाम है I केदारनाथ मंदिर पहुंचने का जो रास्ता है वह काफी एडवेंचर से भरा हुआ है यहां पर पहुंचने के लिए आपको ट्रैकिंग, पिठ्ठू, घोड़े की सवारी और हेलीकाप्टर के द्वारा तय सकते हैं। इस यात्रा में आप चोराबारी ग्लेशियर, मंदाकनी नदी का उद्गम स्थल, भैरव मंदिर, वासुकी ताल और शंकराचार्य समाधि इत्यादि जगहों में जा सकते है

Tourist places of Uttarakhand Valley of Flowers

उत्तराखंड घूमने जाएं और आप अगर फूलों की घाटी जैसे प्रमुख पर्यटक स्थल ना जाए तो आपका उत्तराखंड जाना ही बेकार है I फूलों की घाटी दृश्य मनमोहक है जिसे देखने के बाद आप को लगेगा कि आप किसी जन्नत में आ गए हैं 90 sq km के भूभाग में इसका विस्तार हुआ है भारत सरकार द्वारा 1982 में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत इसे नेशनल पार्क घोषित किया गया है इसके अलावा इसे UNESCO द्वारा विश्व धरोहर का दर्जा दिया गया है। इस घाटी में आपको 500 से अधिक प्रकार की फूलों की दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं I यहां पर जाने के लिए आपको ट्रैकिंग की सहायता लेनी होगी I

Tourist places of Uttarakhand Masoorie | Mussoorie Uttarakhand

अगर आप अपने परिवार के साथ हिल स्टेशन घूमने के लिए जाना चाहते हैं तो आप उत्तराखंड के मसूरी जा सकते हैं यह भारत का प्रमुख हिल स्टेशनों में से एक है I यहां पर स्थित पहाड़ बर्फीले बर्फ की चादर से ढके होते हैं जिसे देखना आपके लिए एक काफी सुखद अनुभव होगा अगर आपकी शादी नहीं हुई है तो आप हनीमून के लिए इस हिल स्टेशन पर जा सकते हैं I इसके अलावा अगर आप एडवेंचर के बहुत ज्यादा शौकीन है यहां पर आप एडवेंचर से जुड़े हुए प्रमुख खेल जैसे- यहाँ boating, trekking, paraglaiding और cable car ride इत्यादि का लुफ्त उठा सकते हैं I

Tourist places of Uttarakhand Nainital | Nainital Uttarakhand Tourism

नैनीताल को झीलों की नगरी कहा जाता है क्योंकि यहां पर सबसे अधिक झील पाए जाते हैं नैनीताल झील की खोज सर्वप्रथम 1841 में P. Barron के अंग्रेज के द्वारा किया गया था नैनीताल के लिए प्रसिद्ध होने का प्रमुख कारण है कि यहां पर यहां पर स्थित झील हरे भरे पहाड़ियों से जुड़े हुए हैं जिसमें नैनी जेल प्रमुख है किसी के नाम पर किस जिले का नाम नैनीताल पड़ा I ई वास लाखों की संख्या में विदेशी सोनाली यहां पर घूमने के लिए आते हैं यहां पर Boatingकरने का अपना अलग ही मजा है नैनीताल में अगर आप एडवेंचर का मजा उठाना चाहते हैं तो यहां पर एडवेंचर से जुड़ा हुआ खेल Boating, Trekking, Camping, Rope way riding, Horse Riding का मजा उठा सकते हैं

Rishikesh Uttarakhand Tourism

ऋषिकेश की गिनती भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में किया जाता है ऋषिकेश दुनिया में प्राचीन मंदिरों और योग के लिए जाना जाता है भारत के प्रमुख के योग गुरु स्वामी रामदेव का योग केंद्र पंतजलि ऋषिकेश में स्थित है I प्रतिवर्ष भारत के विभिन्न शहरों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पर घूमने के लिए आते हैं अगर आप एडवेंचर खेलों के शौकीन है यहां पर आपकोBunjee jumping) या फिर केबल के सहारे पहाड़ के एक सिरे से दूसरे सिरे तक जाना हो (Zip Lining) या रिवर राफ्टिंग या पैराग्लाइडिंग ऐसे खेल उपलब्ध हैं

Tourist places of Haridwar Uttarakhand | Uttarakhand Haridwar Tourism

उत्तराखंड में स्थित हरिद्वार चार धामों का प्रवेश द्वार कहा जाता है उत्तराखंड एक प्रमुख धार्मिक स्थल है और हिंदू धर्म में इसका अपना एक अलग महत्व है यहां पर प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु आकर गंगा में स्नान करते हैं और साथ में मंदिरों में पूजा आरती करते हैं इसके अलावा यहां पर मुंडन संस्कार और अंतिम संस्कार जैसे कार्य भी यहां पर संपन्न करवाए जाते हैं भारत का मशहूर कुंभ मेला हरिद्वार में ही आयोजित किया जाता है

Tourist places of Uttarakhand Dehradun | Dehradun Uttarakhand

अगर आप उत्तराखंड घूमने के लिए जा रहे हैं तो आप इसके लिए जानी है देहरादून जाना ना भूलें देहरादून उत्तराखंड का एक प्रमुख पर्यटन और दर्शनीय स्थल है देहरादून राष्ट्रीय शिक्षण संस्थान और संग्राहलयों के लिए के लिए जाना जाता है जहां पर विदेशों से छात्र पढ़ाई करने के लिए आते हैं इसके अलावा देहरादून एक प्रमुख पर्यटक स्थल भी है जहां पर घूमने की अनेकों प्रकार के पर्यटक स्थल जैसे- डाकुओं का गुफा लच्छीवाला नेचर पार्क . राम राय गुरुद्वारा साथ ही पिकनिक के लिए fun valley park और चिड़ियाघर भी है इसके अलावा अगर आप एडवेंचर खेलकूद के ज्यादा शौकीन हैं तो आपको यहां पर ट्रैकिंग, राफ्टिंग, कैंपिंग और पैराग्लाइडिंग इत्यादि

Uttarakhand Tourist Places जाने का सही समय | Best Time For Uttarakhand Tourism

अगर आप भी उत्तराखंड जाने के बारे में सोच रहे हैं तो आपको मालूम होना चाहिए कि उत्तराखंड जाना हमारे लिए सही वक्त होगा अगर आप उसके बारे में नहीं जानते हैं तो कोई बात नहीं है उसका दूसरा नाम आपको नीचे दे रहे हैं

मार्च से जून-

मार्च से जून का महीना उत्तराखंड में जाने के लिए बहुत अच्छा समय है क्योंकि इस समय भारत के कई राज्यों में काफी गर्मी का मौसम रहता है और ऐसे में लोग गर्मी से परेशान रहते हैं I
इसलिए अगर आप भी अपने परिवार के साथ उत्तराखंड सुनना जाना चाहते हैं तो आप मार्च से जून समझना उत्तराखंड जा सकते हैं ताकि आप को गर्मी से राहत मिले I

जुलाई और अगस्त

जैसा कि आप जानते हैं कि भारत में जुलाई और अगस्त का महीना मानसून का महीना होता है इस समय भारत के सभी राज्यों में जबरदस्त बारिश होती है और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र में यहां पर बारिश के साथ साथ लैंडस्लाइड जैसी समस्या भी जाती है ऐसे में अगर आप इस महीने वहां पर जाते हैं तो आपको काफी सावधानी रखने की जरूरत है और विशेष बात का ध्यान रखिए कि आप कभी भी उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र में बरसात के मौसम में ना जाए इसके बावजूद भी अगर आप उत्तराखंड घूमने जाना चाहते हैं तो आप जा सकते हैं लेकिन आप नैनीताल, हरिद्वार, ऋषिकेश, मसूरी या देहरादून जैसे पर्यटन स्थल पर जा सकते हैं I

सितंबर और अक्टूबर-

सितंबर अक्टूबर का महीना उत्तराखंड जाने के लिए काफी अच्छा मौसम है इस समय उत्तराखंड का मौसम काफी सुहाना और सर्दी नुमा होता है इस समय भारत में शीत का आवागमन हो जाता है इसलिए अगर आप अपने परिवार के साथ घूमना जाना चाहते हैं तो आप सितंबर अक्टूबर के महीने में जा सकते हैं I

अक्टूबर से फरवरी

अक्टूबर से फरवरी का महीना उत्तराखंड घूमने के लिए सबसे अच्छा समय होता है क्योंकि इस समय उत्तराखंड में बर्फबारी शुरू हो जाती है और ऐसे में अगर आपकी शादी नई हुई है तो आप हनीमून के लिए उत्तराखंड के हिल स्टेशन पर जा सकते है I

FAQ :

Q: उत्तराखंड घूमने लायक सबसे प्रमुख पर्यटक स्थल कौन सा है
Ans: ऋषिकेश

Q : उत्तराखंड घूमने के लिए जाए तो वहां से क्या खरीदें
Ans: उत्तराखंड अगर आप घूमने के लिए जा रहे हैं तो वहां पर आपको काफी विभिन्न प्रकार के woolen closth मिल जाएंगे जो काफी सस्ते और अच्छे होते I

Q: उत्तराखंड सबसे ठंडा स्थान कौन सा है
Ans: औली का औसत तापमान 4.3 डिग्री

Q: उत्तराखंड में घूमने के लिए सबसे अच्छे हिल स्टेशन कौन से हैं?
Ans : नैनीताल मसूरी.भीमताल रानीखेत

Q: उत्तराखंड हनीमून कपल को कब जाना चाहिए
Ans; उत्तराखंड हनीमून कपल को अक्टूबर से फरवरी महीने के बीच जाना चाहिए I

भारत के 10 टॉप हिल स्टेशन | Top Hill Station of India

दोस्तों गर्मी का मौसम ही ऐसा मौसम हैं जिसमें अधिकतर लोग घूमने निकलते हैं चाहे वो हमारा भारत हो या विदेश।
परंतु हमारे भारत में ही इतने पर्यटक स्थल स्थित हैं बाहर विदेश से भी बहुत सारे पर्यटक भारत में घूमने आते हैं।
और आज इसलिए हम आपकों आज अपने इस आर्टिकल में भारत के 10 टॉप हिल स्टेशनों के बारें में बतायेंगे जहा आप अपने दोस्तों, परिवार के साथ घूमने जा सकते हैं।

तो हमारे सबसे टॉप 10 नंबर पर जो पर्यटक स्थल हैं वो हैं-

कसौली (Kasauli) हिमाचल प्रदेश


उत्तर भारत राज्य में हिमाचल प्रदेश राज्य में स्थित कसौली एक छोटा हिल स्टेशन है ।
और यहाँ घूमने के लिए अप्रैल का महिना सबसे बेहतरीन है क्योकिं अप्रैल के महीने में यहाँ की खुबसूरती देखने लायक होती है।
और अगर आप शहर के माहौल को छोड कर कही शांत जगह पर जाना चाहते है तो कसौली आपके लिये बेस्ट जगह होगी।

कसौली में घूमने वाली जगह के नाम हैं-
• Monkey point
• Kasauli sunset point
• Christ chruch
• Gilbert nature trail
• Toy train ride

आप यहा जा सकतें है और यहां घूम सकतें है।

मनाली (manali)

हिमाचल प्रदेश में स्थित मनाली भारत की लोकप्रिय हिल स्टेशनों में से एक है ।
खास कर यहाँ पर लोग अप्रैल का महीने में ज्यादा आते हैं क्योंकि उस समय ना ज्यादा गर्म होता है और ना ज्यादा सर्दी।
और ये एक बेस्ट हनीमून डेस्टिनेशन भी है।
और लोगों को बहुत आकर्षित भी करता है।
और यहा पर आप घूमने के साथ -साथ

• पहाड़ों की ट्रेकिंग
• रिवर राफ्टिंग
• कम्पिंग और पाराग्लाइडिंग
• और भी कई सारे ऐक्टिविटी है जो आप मनाली में कर सकते हैं ।
• और यहा पर आप
• Hadimba devi temple
• Jogini falls
• Solang valley
• Museum of himachal culture and folk art
आप इन जगहों पर जा कर घूम सकतें हैं ।

लेह लद्दाख (Leh Ladakh)

लद्दाख बहुत ही खुबसूरत जगह है और आप यहा पर घुमने के लिए अप्रैल से जुलाई के बीच में गर्मियो के मौसम में घूमने जा सकते हैं।
लेह लद्दाख का तापमान 15 से 30 डिग्री तक रहता है।
लद्दाख अपने कम तापमान के लिये जाना जाता है।
यहा साल भर बहुत ठंडा रहता है।
लद्दाख में बाइक राइडर,फोटोग्राफरों और हनीमून डेस्टिनेशन के साथ-साथ नेचर लवर लोगों के लिए बहुत ही अच्छी जगह है।
अगर आप लद्दाख जायें तो Pangong Lake देखना ना भुले ये बहुत ही खुबसूरत जगह है।
और आप यंहा पर-
• Buddhist monasteries
• Temples
• Rich culture
• Colourful festivals
भी सकते है।

Dalhousie

हिमाचल प्रदेश में पहाडों के बीच स्थित इसे भारत का लिटिल स्विटजरलैण्ड भी कहा जाता है।
ये बहुत ही प्रचलित हिल स्टेशन है ।
और आपके लिये यहा पर मार्च से जून घुमने के लिए बहुत ही अच्छा समय है।

आप यहां पर-
• Panchpula waterfalls
• Kakatop wildlife sanctuary
• St. john church
• Khajjir
• Chamera lake
आप इन जगहों पर घुमने जा सकतें हैं ।

महाबालेश्वर (Mahabaleshwar)

महाराष्ट्र में स्थित ये भी एक हिल स्टेशन है ।
महाबालेश्वर फ़ेमस अपने स्ट्रॉबेरी फार्मंग के लिए हैं,
यहा पर स्ट्रॉबेरी फ़ैस्टिवल भी मनाया जाता है।
महाबालेश्वर अपने नदियों,प्राचीन मंदिरों, घने जंगलों और हरी भरी पहाड़ीयो के लिये जाना जाता है ।

यहां पर आप-
• Pratapgarh fort
• Venna lake
• Elephant head point
• Mapro garden
• Lodwick point
पर जाकर भी घूम सकते हैं।

Coorg (कुर्ग)


कर्नाटक में पहाड़ो के बीच स्थित नेचर लवर्स के लिये coorg बेस्ट जगह है।
ये कोडगु के नाम से भी जाना जाता हैं और ये कर्नाटक का सबसे खुबसूरत जगह है।
और ये अपने खुबसूरत नजारे और हरे भरे हरियाली के लिये जाना जाता है ।
यह पर्यटक गर्मी के महीने में बहुत जाना पसंद करते है।
आप यह पर-
• Madikeri fort
• Omkareshwar temple
• Abbey falls
• Government museum
और भी कई सारे जगह है जहा आप घूम सकतें हैं ।

Kodaikanal

दक्षिण भारत के तमिल नाडू में ये एक हिल टाउन है।
ये अपने forested, valleys, lakes ,waterfalls और हिल्स के लिये जाना जाता हैं ।
ये एक हनीमून डेस्टिनेशन में से एक है।
अगर आप यहां पर जाए तो आप Kodaikanal lake भी जरुर देखे , ये बहुत ही खुबसूरत जगह है।
यहा पर आप बोआटिंग भी कर सकते है।

आप यह पर-
• Bryant park
• Bear shola falls
• Coakers walk
• Silver cascade falls
भी घूम सकते हैं।

Srinagar (श्रीनगर)

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर बहुत ही खुबसूरत जगह है।
खासकर की यह अप्रैल के महीने में होने वाले tulip festival में घुमने के लिये सबसे बेस्ट जगह हैं।
ये अपने garden, lakes, houseboat और अपने ट्रेडिशनल कश्मीरी handicraft और ड्राई फ्रूट के लिये फेमस हैं।
ये दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करता है।
श्रीनगर को (समर कैपिटल ऑफ़ जम्मू-कश्मीर) कहा जाता है।
और यह का डल लेक बहुत ही खुबसूरत है ।
ओर आप यहा-
• Salimar bagh mugal garden
• Tulip garden
• Pari mahal
• Chashme shahi bagh
आप यहा देख सकते है।

AULI (ओली)

ये उत्तराखंड में स्थित बहुत ही खुबसूरत हिल स्टेशन है।
लोग तो यहा सर्दियो के समय घुमने जाना बहुत पसंद करते है।
पर गर्मियो में यहा का मौसम बहुत ही सुहावना होता है।
और गर्मियो में यहा का तापमान 10 से 20 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।
और यहां पर आप अप्रैल के महिने मे घुमने जा सकते हैं।
और अगर आपको यहा पर स्नोफलो, स्की करना है तो आप सर्दियो के महीने में जा सकतें हैं ।
यहा घुमने आने वाले पर्यटकों के लिये ये जगह बहुत ही प्रचलित है ।
यहा से पहाड़ो का बहुत ही अच्छा नजारा दिखता है।

आप यहां पर-
• Auli ROPEWAY
• Auli ARTIFICIAL lake
• CHANAB LAKE
• GORSON BUGYAL
• NARSINGH TEMPLE
भी घूम सकतें हैं।

अंडमान ऐण्ड निकोबार आइलैंड

अंडमान ऐण्ड निकोबार द्वीप समूह अप्रैल में घुमने के लिए सबसे अच्छे स्थानों में से एक है।
बंगाल की खाडी में स्थित अंडमान ऐण्ड निकोबार द्वीप समुह लगभग 572 छोटे बड़े द्वीपों से मिलकर बना है ।

आप यहा के प्रचलित दीप में घुमने जा सकतें हैं ।
• Havelock
• Neils islands
• Little andaman
• North andaman
• Viper island
• Rutland island

आप इन द्वीपों में घुमने जा सकतें हैं ।
और यहा पर बहुत सारे resorts है जहा पर आप रह सकते है।

यह भी पढ़ें :

मसूरी में घूमने की जगह | Places to Visit in Mussoorie

नमस्कार दोस्तों ! यात्रा 99 में आपका स्वागत है. जैसा कि आप जानते हैं कि हम अपने ब्लॉग में आपको दुनियां की शानदार जगहों के बारे में बताते रहते हैं. आज कि पोस्ट “मसूरी में घूमने की जगह | Places to Visit in Mussoorie” में भी हम आपको एक प्रकृति की सुन्दर जगह मसूरी के बारे में बताने जा रहे हैं.

पहाडों की रानी | Queens of Hills

दोस्तों मसूरी, पहाडों की रानी जिसे Queens of Hills के नाम से भी जाना जाता है। मसूरी की सुन्दर वादिया और खुबसूरत मौसम पूरे भारत में मशहूर हैं । मसूरी सिर्फ इंडियन टूरिस्ट की पसंद ही नही ब्लकि इंटरनेशनल टूरिस्ट के बीच में भी बहुत मशहूर हैं ।

मसूरी इंडिया की नोर्थेस्ट स्टेट उत्तराखंड के राजधानी देहरादून से 35 किलोमीटर दुर है। मसूरी, बच्चे, जवान और फैमिली के बीच में बहुत ही ज्यादा फैमिली स्पॉट बना रहता है।

Places_to_Visit_in_Mussoorie

मसूरी में आपकों बहुत सी जगह देखने को मिल जाएंगी जैसे –


• Waterfalls
• Mall road of mussoorie
• Natural beauty of mussoorie
• Tourist spot
• और मसूरी का खाना ।

ये सब मसूरी की खुबसूरती को चार चांद लगा देते है।

इस आर्टिकल में हम आपको मसूरी के 10 टूरिस्ट प्लेस बताने वाले है जहा आपकों घूमने जाना चाहिये। और साथ ही बताएगें की यहा पर घुमने का सही समय और कितने पैसे लगेंगे।

मसूरी में घूमने की 10 जगह

दोस्तों आपको हम बता रहे है की लाइब्रेरी चौक को मसूरी का सिटी सेंटर माना जाता है. इसीलिए हम आपको सारे रास्तों की दूरी और समय, लाइब्रेरी चौक से ही बताने वाले है।

ज्वाला देवी मंदिर | Jwala Devi Temple Mussoorie

ज्वाला देवी मंदिर, लाइब्रेरी चौक से लगभग 8 किलोमीटर पर है। जहा पर आपको जानें में तकरीबन 20 से 25 मिनट लग सकता है । ज्वाला देवी का मंदिर उतना ही पुराना है जितना की माता वैष्णो देवी का मंदिर है । हिंदू स्नातन के ग्रंथ में बताया हैं की जब शिव जी माता सती का मृत शरीर लेकर जा रहे थे तो उनके 51 हिस्से शरीर के टूट कर धरती पर गिरे थे। जिस पर से उनका जीब और जलते हुए कपड़े इस मंदिर पर आकर गिरे थे। इसलिए इस मंदिर के पवित्र गुफा में पवित्र ज्योति हमेशा जलती ही रहती है।

साथ ही इस मन्दिर का वर्णन महाभारत में भी किया गया है । इसलिए हर साल नवरात्रो में सारे श्रधालू यहा पर माता ज्वाला देवी के दर्शन करने जरुर आते है। माता ज्वाला का मंदिर अपने हसीन वादियों के लिये बहुत मशहूर हैं । और आप यहा पर पैदल चढाई करके भी आ सकते है।

माता देवी का मंदिर सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक खुला रहता है। और शाम के 4 बजे से लेकर रात 8 बजे तक खुला रहता है।
इस मंदिर में आने की कोई भी एन्ट्री फीस नही है।

लाल टिब्बा मसूरी | Lal Tibba Mussoorie

लाल टिब्बा, लाइब्रेरी चौक से तकरीबन 7.5 किलोमीटर पर है जहा आपको पहुचने में आधा घंटा लग जाता है। लाल टिब्बा का मतलब है लाल पहाड़ । ये मसूरी का सबसे ऊचा पॉइन्ट है। और ये टूरिसटॉ के बीच बहुत मशहूर है । लाल टिब्बा के सुन्दर पॉइन्ट से आप हिमालयन माउंटेन की पूरी रेंज देख सकते हैं । और यहा तक की यहा के रूफ में टेलीस्कोप भी लगा है जहा से हिमालय का नजदीकी नजारा भी देख सकते हैं ।
लाल टिब्बा में घुड़सवारी और ट्रैकिंग करना जरुर चाहिये। इस जगह आपको एक केफे भी मिलेगा।

लाल टिब्बा का समय है सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक। और यहा की एन्ट्री फीस 40 रुपय/व्यक्ति हैं । यहा घूमने के लिये आपकों 1 घंटा ही काफी है। और अगर आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं तो ये जगह फोटोग्राफी लेने के लिये बहुत ही अच्छी जगह है।

क्राइस्ट चर्च मसूरी | Christ chruch Mussoorie

Christ chruch, लाइब्रेरी चौक से सिर्फ 600 मीटर की दूरी पर है यहा पर आप पैदल भी जा सकते है। Christ chruch हिमालयन रेंज का सबसे पहला कैथलिक चर्च है। और ये मॉल रोड के कस्मंदा पैलेस से थोड़े ही पहले है। इस चर्च का निर्माण 1836 में ब्रिटिश कम्युनिटी के द्वारा किया गया था ।

अगर आप यहा घुमने का प्लान तब बनायें जब आप मॉल रोड घूमने का प्लान बना रहें हैं । और अगर आपका होटल मॉल रोड में ही है तो आप चर्च पैदल भी जा सकते हैं । इस चर्च का समय है सुबह 7 बजे से शाम 6:30 बजे तक। और ये चर्च संडे को खुलता है। सुबह के 8 बजे से शाम के 6:30 बजे तक । यहा पर जाने की कोई भी एन्ट्री फीस नही है ।

बस आपको ये सलाह दी जाती है की अगर आप वहा जाए तो ऐसे कपड़े पहन कर जाए जिसमें आपके कंधे और घुटने ढके हुए हो।

कैमल बेक रोड मसूरी | Camel Back Road

Camel back road, लाइब्रेरी चौक से तकरीबन 3 किलोमीटर पर हैं । और मसूरी मॉल रोड से आप यहा पैदल भी जा सकते है।Camel back road पीस वॉक करने के लिए मशहूर है। जहा आप प्रकृति का मजा लेते-लेते मसूरी की वादियों का मजा ले सकते है।

यहा पर सुबह की जोग्गिंग और शाम की वॉक करना सबसे मशहूर हैं । यहा पर आपकों बहुत से दुकान देखने को मिल जाएंगे जहा से आप अपने परीजनों के लिये कपड़े और भी चीजे खरीद सकते है।

ये 24 घंटे खुली रहती हैं लेकिन यह पर जाने का सबसे अच्छा समय सुबह 7 बजे से सुबह 10 बजे तक का हैं । और अगर आप यहा शाम को जाना जाते है तो 5 बजे के बाद ही जाए। यहा जाने की कोई भी एन्ट्री फीस नही है ।

गन हिल पॉइंट मसूरी | Gun Hill point Mussoorie

Gun hill point, लाइब्रेरी से तकरीबन 5 से 6 किलोमीटर की दूरी पर है । जहा आपको 20 मिनट जाने में
लगेगा । ये मसूरी का सबसे प्राचीन और दुसरा हाईएस्ट पॉइन्ट हैं । ये अपने फोटोग्राफी के लिए और 360 डिग्री हिमालयन नजारे के लिये मशहूर हैं ।

इस पॉइन्ट से आपको Doon valley साफ दिखेगी।

ये मसूरी का बहुत ही ज्यादा मशहूर जगह हैं जो मसूरी मॉल रोड से 400 फिट ऊपर है। यहा पर जाने के लिये आप रोपवे का भी इस्तेमाल कर सकते हैं । जो मसूरी मॉल रोड से शुरु होती हैं ।

इस जगह का समय सुबह के 10 बजे से शाम के 6 बजे तक है। और यहा की एन्ट्री फीस 75 रुपय/ व्यक्ति है।

भट्टा फाल्स मसूरी | Bhatta falls Mussoorie Uttarakhnad

Bhatta falls , लाइब्रेरी चौक से तकरीबन 13 किलोमीटर की दूरी पर है । जहा आपको 30 से 34 मिनट का समय लग सकता है ।
Bhatta falls अभी नया पिकनिक सपोट बनाया गया है जो मसूरी के पास ही पडता है। और ये टूरिस्टो के बीच आजकल आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है ।

Bhatta falls ट्रैकिंग करने के लिये बहुत ही ज़बरदस्त जगह है।

यहा पर आपकों खाने पीने की कोई भी दिक्कत नही होने वाली है क्योंकि यहा पर फूड़ शॉप बनाया हुआ है।
यहा जाने के लिये आप रोपवे का भी इस्तेमाल कर सकते हैं । यहा पर आने के लिये कोई भी एन्ट्री फीस नही है। यहा का समय सुबह 8 बजे से शाम के 5 बजे तक हैं ।

धनौल्टी मसूरी | Dhanaulti Mussoorie

ये लाइब्रेरी चौक से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर है जहा पहुचने में आपकों 2 से ढाई घंटे लग सकते हैं । ये एक छोटा सा हिल स्टेशन है।
जो गढवाल हिमालयन रेंज के फूट हिल्स में बसा हुआ है। धानौलटी अपने प्रकृति सुन्दरता के लिये मशहूर है। यहा पर घूमने की जगह Eco park और Devgarh fort है। यह का ऐडवेंचर पार्क और टिहरी डाम भी जवान बच्चों के बीच बहुत मशहूर हैं। अगर आप मसूरी से धानौलटी जाने की सोच रहे है तो आप एक दिन में धानौलटी घूम कर भी आ सकते है। यहा पर घूमने का सबसे अच्छा समय मानसून के बाद का है ।
तब यह की हरयाली देखते ही बनती है। यहा पर आप अपने गाड़ी से भी जा सकते है और नही तो आपको वहा पर किराए में टैक्सी भी मिल जाएगी।

मसूरी झील | Mussoorie lake


ये लाइब्रेरी चौक से तकरीबन 6 किलोमीटर की दूरी पर है जो देहरादून और मसूरी के हाईवे पर पड़ता है । मसूरी लेक सिटी बोर्ड के द्वारा बनाया गया एक टूरिस्ट प्लेस है। जहा पर आपकों खरीदने के लिए बहुत सारे समान मिल जाएंगे। यह पर एक haunted house भी हैं ।
आप वहा पर बोटिंग और एक्सट्रीम स्पोर्ट्स भी कर सकते हैं । जैसे की paragliding, KTV riding, skywalk और zip line.
और यहाँ की एन्ट्री फीस 12 रुपए हैं । और यहा का समय सुबह के 8 बजे से शाम के 7 बजे तक हैं ।

केम्पटी फाल्स मसूरी | Kempty Falls Mussoorie

ये लाइब्रेरी चौक से तकरीबन 14 किलोमीटर की दूरी पर है । जहा आपको पहुचने पर 35 मिनट लग सकता हैं । ये मसूरी का सबसे मशहूर टूरिस्ट प्लेस है। जहा पर हर साल लाखो टूरिस्ट आते है। यहा पर जाने के लिए आप रोपवे का भी इस्तेमाल कर सकते है। जिसमें आपकों आने और जाने की फीस 120 रुपय पड़ेगी। यहा पर वॉटर फॉल का मजा लेना तो बनता है । और आप यहा पर बोटिंग का भी मजा ले सकते है।

यहा का समय सुबह और शाम का है और यहा पर आने की कोई भी एन्ट्री फीस नहीं है । और यहा पर गर्मियों में आनें का सबसे अच्छा मौका है ।

मॉल रोड मसूरी | Mall Road Mussoorie

ये लाइब्रेरी चौक के बिल्कुल बगल में हैं लाइब्रेरी चौक से शुरु होकर पिक्चर प्लेस तक तकरीबन 2 किलोमीटर पर है ।
ये जगह फोटोग्राफी के लिए मशहूर हैं। और मसूरी का सबसे जबरदस्त होटल और रस्तोर्ंट मसूरी के मॉल रोड पर ही है।
मसूरी मॉल रोड घूमने का सबसे बेहतरीन तरीका पैदल चल कर जाने का है।

यहा पर बहुत ही मशहूर video game parlour और रस्तोरेंट भी है जो बच्चों के लिये आकर्षण का केन्द्र बना रहता हैं।
मसूरी की मॉल रोड इसके बिल्कुल प्राइम लोकेशन में है। अगर आप होटल में रुकना चाहतें हैं तो आप मॉल रोड पर ही ले।
यहा की एन्ट्री फीस फ़्री है लेकिन अगर आप आप अपने गाड़ी से आ रहे है तो आपकों यहा घुसने के लिये 150 रुपय देने होंगे।
और यहा घूमने का सबसे सही समय शाम का है ।

दोस्तों अगर आप इन 10 जगह पर घूमने जाना चाहतें है तो आप होटल मॉल रोड में ही ले ।
ताकि आप कही अच्छा जगह रुक कर इन सभी जगह में घूम सकते हैं ।

मसूरी का मौसम | मसूरी का तापमान | मसूरी कब जाये | Mussoorie Weather

पहाड़ों की रानी मसूरी का मौसम हमेशा सुहावना बना रहता है. साल के सभी महीने में मौसम (mussoorie temperature) बेहद खुशनुमा रहता है जिससे हर साल भारी संख्‍या में पर्यटक आकर्षित करते है। मसूरी हिल स्‍टेशन सभी मौसम में सुंदर लगता है इसीलिए इसे पहाड़ों की रानी कहा जाता है । फिर भी मसूरी घूमने का सबसे अच्छा समय मार्च से जून के बीच और सितम्‍बर से नवंबर के बीच माना जाता है।

बद्रीनाथ धाम की यात्रा कब और कैसे करे | Badrinath Temple Yatra Kaise Kare


नमस्ते दोस्तों आज हम आपको अपने आर्टिकल में बताने वाले है की अगर आप बद्रीनाथ की यात्रा करने की सोच रहे है और आप ये सोच रहे है की आप किस तरह ये यात्रा करें और कब और कैसे करे , यात्रा में खर्चा कितना होने वाला है और वहा पर रहने खाने की क्या व्यवस्था रहेगी।
तो आपको हम इन सारे सवालों के जवाब देने वाले है की आपको कब और क्या करना चाहिये।

बद्रीनाथ के कपाट कब खुलेंगे | Badrinath Dham Opening Date

जैसे की आपको पता है की बद्रीनाथ के कपाट 8 मई को खुल चुके है । और बहुत दूर-दूर से सभी जगह से श्रधालू दर्शन करने आते है।
यह पर इंडिया के ही नही बाहर से भी विदेशी लोग दर्शन करने के लिये आते है। आप कही से भी आये आपको सबसे पहले हरिद्वार आना पड़ेगा। क्योकिं हरिद्वार सभी मुख्य परिवहनो के मार्ग से जुड़ा हुआ है। या फिर आप योग नगरी ऋषिकेश में भी आ सकते हैं ।

हरिद्वार से बद्रीनाथ | Haridwar to Badrinath Distance | बद्रीनाथ यात्रा कैसे करे

अब आपको हम बताते है की हरिद्वार से बद्रीनाथ जाने का सबसे सस्ता रस्ता कौन सा होगा। अगर आप हरिद्वार में सुबह के बाद आते है तो आपको उसी दिन बद्रीनाथ जाने के लिए कोई भी बस नही मिलेगी . हरिद्वार से बद्रीनाथ की यात्रा 316 किलोमीटर के आसपास का हैं ।और योग नगरी,ऋषिकेश से बद्रीनाथ के लिये 290 किलोमीटर का रस्ता है। इसके आलावा अगर आप हवाई जहाज से यात्रा करना चाहते है तो इसके लिये आपको आना होगा देहरादून के एअरपोर्ट में, देहरादून एअरपोर्ट पहुचने के बाद रास्ते का सफर ही करना होगा।

लेकिन हम आपको बता दे की आप हो सके तो ट्रेन के द्वारा ही हरिद्वार पहुचें । हरिद्वार से बद्रीनाथ जाने के लिये 2 तरीके है। सबसे सस्ता और अच्छा तरीका बस से है हरिद्वार से बहुत सारी बस बद्रीनाथ के लिए चलती है। जब आप हरिद्वार रेलवे स्टेशन पहुचते है तो रेलवे स्टेशन के बाहर ही बहुत सारे टिकट एजेन्सी बनी हूई है। जहा से आप अपना हरिद्वार से बद्रीनाथ के लिये टिकट ले सकते है। और इसके अलावा आप हरिद्वार बस स्टेशन भी जाकर बस का टिकट ले सकते है। बस से बद्रीनाथ का किराया जो गोवेर्ंमेंट बस चलती है उनका किराया 550-600 रुपय तक का है।

Badrinath_Temple_Yatra_Kaise_Kare

इसके आलवा अगर आप किसी थर्ड पार्टी से ऐडवांस बूकिंग करते है जैसे red bus या make my trip से भी कर सकते है लेकिन आपकों इसमे 100 रुपय से 200 रुपये ज्यदा चुकाने पड़ते है। बस आपका इसमें फायदा ये होगा की आपकों अपनी मन पसंद की सीट मिल जाती है।
इसके अलावा अगर आपको हरिद्वार से डायरेक्ट बस बद्रीनाथ के लिये नही मिलती, तो इसके लिये आपको जोशीमठ जाना होगा ।
क्योकिं बद्रीनाथ के लिए शाम को कोई भी बस नही मिलती है। क्योंकि बद्रीनाथ का रस्ता बहुत ही खतरनाक है इसलिए कोई भी वाहन को शाम के लिये रोक दी जाती है। कोई भी वाहन को शाम को जोशी मठ के आगे जाने नही दिया जाता है। इसलिए आप हरिद्वार से जोशीमठ बस के द्वारा चले जाईए।

फिर दुसरे दिन सुबह-सुबह वहा पर बहुत सारी टैक्सी चलती है और 100 रुपय का किराया लेती है। जिससे आप बद्रीनाथ तक जा सकते है।
अगर आप देहरादून हवाई जहाज से आये है तो देहरादून पहुचने के बाद भी देहरादून से सुबह 4 बजे से 7 बजे तक 3 से 4 बसें बद्रीनाथ के लिये चलती है।

प्राइवेट टैक्सी से यात्रा | Haridwar to Badrinath Taxi

यह ऑप्शन है की आप हरिद्वार ऋषिकेश से पहुचने पर प्राइवेट टैक्सी कर सकते हैं । बद्रीनाथ तक जाने के लिये प्राइवेट टैक्सी वाले आपसे 8000 से 10,000 रुपय तक ले सकते है। ये आपको राउंड ट्रिप में ही बद्रीनाथ यात्रा के दर्शन कराते हैं । पहले दिन ये आपको बद्रीनाथ धाम लेकर जाएंगे , पहलें आप बद्रीनाथ जी के दर्शन कर लीजिये । फिर दुसरे दिन ही आप माणा गाँव और आसपास के जगह में घूम लीजिए ।
और शाम तक ये आपकों हरिद्वार वापस ले कर आ जाएंगे।

बद्रीनाथ में रुकने की व्यवस्था | Badrinath Dham Hotels

बद्रीनाथ में आप 3 तरीके से रुक सकते है।

  1. सबसे सस्ता ऑप्शन ये हैं की वहा पर बहुत सारे आश्रम बने हुए है जहा पर आपकों 200 रुपय से 300 रुपय तक रात को रुकने के लिये रुम मिल जाते है।
  2. यहा पर GMVM का यात्री निवास बना हुआ है और एक होटल देव लोक भी बना हुआ है। अगर आप यात्री निवास में रुकते है तो आपकों मात्र 300 रुपय में डोरमेट्री उप्लब्ध मिलेगा। और अगर आप होटल देवलोक में रुकते है तो आपको यहा पर सेमी डीलक्स और डीलक्स रुम मिल जाता है। सेमी डीलक्स का किराया 3800 रुपय है और डीलक्स रुम का 4800 रुपय है। और अगर आप यहा रुकते है तो आपकों यहा नाश्ता,लंच और डिनर सब मिलता है।
  3. और यदि आप यात्री निवास में रुकते है तो आपको यहा पर सिर्फ 300 रुपय में डोरमेट्री ही मिलती है ।
  4. इसकी बूकिंग आप वहा पर जाकर भी कर सकते है और अगर आप अपनी बूकिंग पहले ही ऑनलाइन कराना चाहते है तो WWW.GMVNONLINE.COM पर जाकर कर सकते है।

इसके आलावा बद्रीनाथ पर भी बहुत सारे होटल बने हुए है। अगर आप पीक सीजन में जाते है तो आपको यहा पर 2500 से 4000 तक के रुम मिल जाते है। और अगर ऑफ़ सीजन में जाते है तो आपको 800 से लेकर 1500 तक के बीच में रुम मिल जाते है।

बद्रीनाथ यात्रा के लिये सही समय क्या है | Badrinath Yatra Jane Ka Samay | Best Timing for Badrinath

जैसे की आपको पता है की बद्रीनाथ मंदिर के कपाट 6 महीने के लिये खुलते है और 6 महीने के लिये बंद रहते है।

और बद्रीनाथ का मंदिर बिकुल पहाडों के बीच में बना हुआ है। और सर्दियों में यहा पर तापमान बिल्कुल गिर जाता है और बहुत बर्फबारी होती है। बद्रीनाथ के कपाट अप्रैल से मई के महिने में अक्षय तृतीया में खुलते है। और अक्टूबर और नवंबर के महीने में कार्तिक पूर्णिमा में बंद कर दिए जाते है। बस 6 महीने में बद्रीनाथ की यात्रा चलती है। बद्रीनाथ की यात्रा करने के लिये सबसे अच्छा समय होता है सितंबर और अक्टूबर के महिने का। क्योकि इस समय बहुत कम भीड होती है और आप बहुत कम पैसो में बद्रीनाथ की यात्रा कर सकते है।
बद्रीनाथ का जो पीक सीजन होता है वो मई ओर जून का होता है। क्योकिं बहुत से भक्त बद्रीनाथ के दर्शन के लिये मई और जून में ही जाते है।

और जुलाई और अगस्त के महिने में यात्रा करने से बचना चाहिये क्योकिं ये मानसून का महीना होता है और पहाड़ों में बरसात होने से भूस्खलन होने की ज्यादा संभावना होती है। और 3 या 4 दिन का जाम भी लग जाता है इसलिए आपको इन महिनो में यात्रा नही करनी चाहिये।

बद्रीनाथ में रहने के लिये कितने दिन का प्लान बनाना चाहिये

यहा पर आपके पास 2 ऑप्शन है अगर आप बस के द्वारा जा रहे है तो आपको बद्रीनाथ के लिये 2 रात का नाइट स्टे बनाना पड़ेगा।
क्योकि अगर बस से जाएंगे तो बस से पहले ही दिन आपको 10 से 12 घंटे लग जाएंगे और शाम तक ही आप पहुचेंगे तो आप बद्रीनाथ के दर्शन करेंगे। और वहा भी बहुत सी जगह है जहा आपको घुमना होता है जिसे हम आपको आगे बतायेंगे।

और अगर आप अपने प्राइवेट गाड़ी से बद्रीनाथ की यात्रा कर रहे है तो आपको इसके लिये 1 दिन का नाइट स्टे ही बनाना पड़ेगा।
अगर आप अपने गाड़ी से जाते है तो आप पहले ही दिन पहुच जाते है बद्रीनाथ के दर्शन करते है।
दुसरे दिन सुबह उठ जाते है और बद्रीनाथ के पास वाले जगह में घूमते है और उसी शाम आप अपने गाड़ी में वापस आ जाते है।

बद्रीनाथ मे खाने-पीने की व्यवस्था क्या है |

बद्रीनाथ में आपको खाने पीने की कोई भी दिक्कत होने वाली नही है यहा पर भी आपको थाल सिस्टम देखने को मिल जाता है।
100 से लेकर 150 तक की थाली का खाना आपको मिल जाएगा। और आपको यहा पर साउथ इंडियन खाना खाने को भी मिल जाएगा।

बद्रीनाथ धाम के दर्शन कैसे करे | Badrinath Dham Darshan Kaise Kare

दोस्तों जब आप बस स्टॉप से उतरते है तो मात्र 500 की दुरी पर बद्रीनाथ का मंदिर बना हुआ हैं आप मंदिर पहुँच जाए।
मंदिर परिसर में ही जल कुंड बना है आप चाहे तो वहा पर नहा भी सकते हैं । इसके बाद आप मंदिर में जाकर लाईन में लग जाए।
अगर आप मई और जून के महीने में दर्शन करने जा रहे है तो आपकों दर्शन करने के लिये 3 से 4 घंटे लाईन में लगना पड़ता है ।
और अगर आप ऑफ़ सीजन में जा रहे है तो आपको दर्शन के लिए आधे घंटे से 1 घंटा ही लगता हैं ।

इसके सामने ही बद्री विशाल विराजमान है उनके दर्शन करिये और वापस आ जाईए। इसके बाद आपको जाना है ब्रहम कपाल ।

ब्रहम कपाल वही जगह है जहा पर लोग अपने पूर्वजों के पिण्ड दान करते हैं ।

बद्रीनाथ मन्दिर के आस पास दर्शनीय स्थल | Badrinath Temple Famous Places

बद्रीनाथ के 1 किलोमीटर की दुरी पर ही है भारत का आखिरी सीमान्तर माणा गाँव पड़ता है । माणा गाँव जाने पर आप यहा 3 या 4 जगह घूम सकते हैं आपको वहा पर व्यास गुफा देख सकते है वहा पर दर्शन करने चले जाए। यही में गणेश गुफा भी है वहा भी दर्शन कर सकते हैं ।
और यही से बोला जाता हैं की पांडव स्वर्ग जा रहे थे और भीम ने एक रास्ते में शिला डाल कर नये पूल का निर्माण किया था। तो आप वहा पर जाकर भी शिला देख सकते हैं । यही पर सरस्वती माता का मंदिर भी बना है और यही पर आपको भारत की आखिरी चाय भी पीने को मिल जाएगी। इन सब जगह घूमने में आपको ज्यादा समय नही लगने वाला हैं । 1 से डेढ़ घंटे में ही आप ये सब जगह घूम सकते हैं ।

बद्रीनाथ के लिये E-PASS की आवश्यकता | Badrinath Dham E Pass

दोस्तों आप कोई भी चार धाम की यात्रा करते है तो आपकों E-PASS बनाना अनिवार्य है।
इस्के लिये आप devasthanam.uk.gov.in की वेबसाइट पर जाकर भी अपना पंजीकरण करा सकते है।

बद्रीनाथ में ध्यान देने योग्य बातें | Badrinath Dham Travel Guide

दोस्तों अगर आप बद्रीनाथ की यात्रा कर रहे हैं तो आप पैकिंग करते समय रेनकोट और थोड़े गर्म कपड़े भी लेकर जाए।
क्योकिं आप को हमने बताया की बद्रीनाथ पहाडों में है तो मौसम कभी भी बदल जाता है और ऐसे में आपको अपनी पूरी तैयारी कर लेनी है।

और जाने से पहले एक बार आपने डॉक्टर से परामर्श जरुर करे, अगर आप किसी भी तरह की दवाईयों का सेवन करते है ।

यह भी पढ़ें :

केदारनाथ यात्रा कैसे करे | Kedarnath Temple Yatra Kaise Karen

नमस्कार दोस्तों, यात्रा 99 में आपका स्वागत है. हमेशा की तरह आज भी हम आपके लिए एक और शानदार धार्मिक यात्रा की जानकारी लेकर आये हैं. आज की पोस्ट केदारनाथ यात्रा कैसे करे | Kedarnath Temple Yatra Kaise Karen में हम आपको उत्तराखंड के विश्विख्यात धार्मिक मंदिर केदारनाथ की यात्रा की जानकरी लेकर आये हैं. जैसे की आपको पता ही है की हर साल कई लोग केदारनाथ की यात्रा पर जाते है और अगर आप भी इस साल केदारनाथ की यात्रा पर जाने वाले है और इस यात्रा की प्लानिंग कर रहे है तो हम आपको अपने इस आर्टिकल में बताने वाले है की आप किस तरीके से केदारनाथ यात्रा पर जा सकते है और यात्रा पर जाने का कौन सा समय सही रहेगा , केदारनाथ पर रुकने और खाने पीने की क्या व्यवस्था है, केदारनाथ के यात्रा में कितना समय लगता है और केदारनाथ यात्रा में कितना खर्च आता है।

केदारनाथ यात्रा केदारनाथ यात्रा के कपाट कब खुलते हैं | Kedarnath Yatra Opening Date 2022

हमारा देश एक धार्मिक देश है. भगवान् पर लोगों का अटूट विश्वास है. इसीलिए हमारे देश में धार्मिक यात्रा का भी बहुत महत्व है. हर साल करोड़ों लोग धार्मिक यात्राएं करते हैं. और सबके मन में यात्रा को लेकर एक सवाल जरुर होता है की किसी भी धार्मिक मंदिर की शुरुवात कम होती है. लोग अक्सर ऐसे प्रश्नों के जवाब खोजते रहते हैं जैसे केदारनाथ यात्रा केदारनाथ यात्रा के कपाट कब खुलते हैं | Kedarnath Yatra Opening Date 2022, केदारनाथ यात्रा कब तक खुलंगे, आदि.


तो आपको बता दें कि केदारनाथ मंदिर के कपाट वर्ष के मई महीने में खोले जाते हैं. इस वर्ष 2022 में भी 6 मई को सुबह 6:25 बजे शुभ मुहूर्त पर खुल चुका है।

केदारनाथ यात्रा पर कैसे जाए | Kedarnath Yatra Kaise Jaye | Haridwar to Kedarnath Distance

केदारनाथ यात्रा की शूरवात होती है हरिद्वार से। क्योकिं हरिद्वार मुख्य रूप से सभी शहरों के परिवाहन मार्ग से जुड़ा हुआ है।
आप ट्रैंन, बस या फिर अपने गाड़ी से भी हरिद्वार पहुच सकते है। इसके अलावा आप देहरादून या ऋषिकेश से भी केदारनाथ की यात्रा कर सकते है। दोस्तों, हरिद्वार से आपको जाना होता है सोनप्रयाग और इसकी दुरी 235 किलोमीटर के लगभग हैं ।
आप बस के द्वारा भी सोनप्रयाग जा सकते है हरिद्वार में ही बस स्टॉप बना हुआ है जहा सुबह 5 बजे से शाम के 4 बजे तक बस चलती है।

हम आपको 2 तरीके बतायेंगे जहा से आप हरिद्वार से किस तरह सोनप्रयाग तक सफर कर सकते हैं ।

  1. जैसे ही आप हरिद्वार के रेलवे स्टेशन पहुचते है वही पर आपको बहुत सारी ऐसी ट्रैवल एजेन्सी दिखेगी, जहा से आप बस की टिकट ले सकते है।इसके आलवा आप चाहे तो सीधे बस स्टॉप से ही टिकट ले सकते है लेकिन आप बस की टिकट पहले ही ले लेते है तो आपको बस में कोई दिक्कत होने वाली नही है। कभी-कभी बहुत ज्यादा भीड होने के वजह से बस की टिकट मिलने में बहुत दिक्कत हो जाती है। इसके आलावा अगर आप बस की टिकट ऑनलाइन लेना चाहते है तो आप पहले से ही ऑनलाइन टिकट ले सकते है । कोई भी थर्ड पार्टी जैसे RED BUS, MAKE MY TRIP में जाकर आप अपने लिये टिकट ले सकते है। लेकिन यहा हम आपको बता दे की ऑनलाइन बस की टिकट आपको 400 की पड़ेगी और यही टिकट आपको ऑफ़लाइन में 100 से 200 का ज्यादा महेंगा पड़ेगा।
  1. और दुसरा तरीका है की आप हरिद्वार पहुच कर प्राइवेट टैक्सी भी ले सकते हैं । प्राइवेट टैक्सी के खर्चे की बात करे तो 10,000 से 12,000 तक का खर्चा हो सकता है। इसके आलवा अगर आपके पास खुद की गाड़ी है तो आप अपनी गाड़ी से सोनप्रयाग तक जा सकते है।

सोनप्रयाग में ही बहुत बड़ी पार्किंग बनी हूई है जहा आप अपनी गाड़ी खडी कर सकते हैं । अगर आप अपनी कार खडी करते है तो इसके लिये आपकों 100 रुपय और अगर बाइक खडी करते है तो 50 रुपय एक दिन के हिसाब से लगते हैं ।

अगर आप कम खर्च में केदारनाथ यात्रा करना चाहते हैं तो आप बस से ही यात्रा करे ।

केदारनाथ यात्रा

केदारनाथ यात्रा का समय मई से सितम्बर
Haridwar to Kedarnath Distance239 Kms
Dehradun to Kedarnath Distance254 Kms
Rishikesh to Kedarnath Distance216 Kms
Delhi to Kedarnath Distance295
Kedarnath Temperature May | Kedarnath Weather May17 डिग्री
Kedarnath to Badrinath Distance218 Kms

चार धाम यात्रा 2022 में आपकों अगर उत्तराखंड आना है या फिर जो लोग उत्तराखंड के रहने वाले है तो उनको भी चारधाम की यात्रा के लिये e-pass बनवाना अनिवार्य हो गया है । इसके लिये आप अपना e-pass ऑनलाइन बना सकते है।

केदारनाथ यात्रा का पंजीकरण कैसे करे | Kedarnath Yatra Registration

अगर आप केदारनाथ की यात्रा पर जाना जाते है तो आपको पहले पंजीकरण करना पड़ेगा।
इसके लिये आपको चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड की वेबसाइट devasthanam.uk.gov.in पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं ।

केदारनाथ यात्रा कब करनी चाहिये | Best Time to Visit Kedarnath | Kedarnath Temple Yatra Kab Kare

जैसे की आपको पता है दोस्तो की केदारनाथ के कपाट 6 महीने खुले और 6 महीने बंद रहते है। केदारनाथ के कपाट मई के महीने में अक्षय तृतीय में खोले जाते है और दीपावली के आसपास केदारनाथ मन्दिर के कपाट बंद कर दिए जाते है।

अगर आपको यात्रा करनी है तो आपको सबसे अच्छा सितंबर से अक्टूबर के महीने के बीच में यात्रा करनी चाहिये।
क्योकिं इस समय मौसम भी बहुत अच्छा होता है और ज्यादा गर्मी भी नही होती और ज्यादा भीड भी नही होती है।

और अगर आप मई और जून में केदारनाथ यात्रा करने चाहते है तो ये इस यात्रा के लिये ठीक सीज़न होता है और इस महिने में बहुत गर्मी और बहुत भीड भी होती है। भीड होने के कारण रुम का रेंट भी डबल से ट्रिपल हो जाता है। अगर आप मई जून में यात्रा करते हैं तो आपको रुम का किराया 3000 से 4000 के आस पास पड़ता है । और वही आप सितंबर और अक्टूबर में यात्रा करते है तो आपको यही रुम 1000 रुपय का पड़ता है।

यात्रा के लिये ध्यान देने वाली बात

दोस्तों जुलाई ओर अगस्त के महीने में यात्रा करने से बचना चाहिये कयोंकि ये समय मानसून का समय होता है और केदारनाथ मन्दिर बहुत पहाड़ी में है और ऐसे में इस महीने में कभी भी बरसात शुरु हो जाती है कभी भी भूस्खलन हो जाता है।
और इसलिए जुलाई और अगस्त में यात्रा करने से बचना चाहिये।

केदारनाथ यात्रा में रुकने की व्यवस्था | सोनप्रयाग में रुकने की क्या व्यवस्था है |

सोनप्रयाग में बहुत सारे गेस्ट हाउस, होटल और लौज बने हुए है। जहा पर आप रात को रुक सकते है। अगर आप यहा मई और जून में किसी भी गेस्ट हाउस, होटल और लौज के रुम में रुकते है तो रुम का किराया 3000 से 5000 तक भी हो जाता है।

और अगर आप ऑफ़ सीज़न यात्रा करना चाहतें हैं यानी सितंबर और अक्टूबर में यात्रा करना चाहतें हैं तो यही रुम का किराया 1000 से 1500 तक भी हो जाता है।

दोस्तों अगर आप कम खर्च में सोनप्रयाग में रुकना चाहतें हैं तो सोनप्रयाग में ये भी उप्लब्ध है। यहा आपको 350 रुपय में भी नाइट स्टे करने को मिल जाते है। और यही सितंबर और अक्टूबर में आपको ये 100 से लेकर 150 में मिल जाएगी।

हरिद्वार से सुबह आप निकलेंगे तो शाम को सोनप्रयाग अपने बजट के अनुसार पहुच जाएंगे ।

जब आप सोनप्रयाग पहुच कर वहा रात को रुम में रुकते है तो आपको दुसरे सुबह ही 3 से 4 बजे ही उठ जाना होता है क्योकिं आपको यहा से गौरी कुंड जाना होता है।

गौरी कुंड तक जाने के लिये आपको वही से सूमो, सफ़ारी टाइप की गाड़ी मिल जाती है। जो आपसे 30 रुपय/व्यक्ति सवारी लेती है जो आपको गौरी कुंड तक छोड देती है । सोनप्रयाग से गौरी कुंड के बीच का रस्ता 5 किलोमीटर के आसपास है। लेकिन आपको इन गाड़ी के लिये बहुत लंबी-लंबी लाईन लगानी पड़ सकती है।

इसके आलवा सोनप्रयाग से केदारनाथ के लिये घोड़े और ख्चर भी मिल जाते है।

गौरी कुंड पहुचने पर ही आपको वहा पर गौरी माता का मन्दिर दिखेगा। जहा आपको उनके दर्शन कर लेने है। यही पर गौरी कुंड भी है जहा का पानी हमेशा आपको गर्म ही मिलेगा।

यही से केदारनाथ यात्रा के लिये पैदल यात्रा शुरु होती है। जो लोग पैदल यात्रा नही कर सकते हैं उनके लिये ही घोड़े और ख्चर की सुविधा भी उपलब्ध हैं । जिसके लिये आपकों 2300 रुपय देना होगा। और अगर आप पालकी में जाना चाहतें हैं तो आपको इसके लिए 5000 से 6000 रुपय देने होते है। और अगर आप ऑफ़ सीजन में जाते है तो यही घोड़े ख्चर के दाम कम हो जाते है। परंतु ये 2300 रुपय गोवेर्ंमेंट के तरफ़ से तय किये गये हैं ।

केदारनाथ की चढ़ाई में कितना समय लगता है | Kedarnath Yatra Distance Timing

अगर आप पैदल यात्रा कर रहे हैं तो वहा पर बहुत से दुकानें हैं जहा से आपकों एक लाठी ले लेनी है जिससे आपकों पैदल यात्रा करने में आसानी हो जाती है। किसी भी दुकान से ये लाठी आपको 30 रुपय में मिल जाती है। गौरी कुंड से केदारनाथ मन्दिर की दुरी लगभग 16 किलोमीटर के आसपास का है। और अगर आप पैदल यात्रा करते है तो यही दुरी आपको ज्यादा लगेगी जैसे 20 से 21 किलोमीटर ।
क्योंकि जो पुराना रस्ता था वो 16 किलोमीटर के आसपास का था लेकिन 2013 में जो आपदा आयी थी जिससे ये रस्ता खत्म हो गया था और अब जो नया रस्ता बना है वो 20 से 21 किलोमीटर के लगभग है।

केदारनाथ हेलीकॉप्टर बुकिंग 2022 | Kedarnath Helicopter Booking

अगर आप हेलीकाप्टर से यात्रा करना चाहते हैं तो इसके लिये आपको सोनप्रयाग जाने की जरूरत नही है इसके लिये सोनप्रयाग से 15 किलोमीटर पहले एक जगह पड़ती है फाटा । फाटा से ही हेलीकाप्टर की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। अगर आप ऑन सीज़न पर ये यात्रा कर रहे हैं तो आपको अपनी टिकट ऑनलाइन ही बुक कर लेनी है। वैसे फाटा में ही ऑफ़ लाईन ही टिकट बुक हो जाते है। वही पर टिकट काउंटर बना हुआ है।

अगर आप हेलीकाप्टर से यात्रा कर रहे हैं तो इसका टिकट 6000 राउंड ट्रिप के हिसाब से देना होगा। 6000 रुपय में आप केदारनाथ जाएंगे और दर्शन करेंगे फिर आप केदारनाथ से ही हेलीकाप्टर में वापस फाटा आ जाते है।

गौरी कुंड से पैदल यात्रा | Kedarnath Gorikund Paidal Yatra

अगर आप गौरी कुंड से पैदल यात्रा कर रहे हैं तो बीच सफर में ही आपकों बहुत सारे झरने देखने को मिलते है। एक तरफ से आपकों मन्दाकिनी नदी बहती नजर आयेगी। और दुसरी तरफ आप पैदल यात्रा कर सकते हैं । पैदल यात्रा करते हुए ही आपकों रास्ते में खाने पीने की कोई भी दिक्कत नही होती है। क्योंकि रास्ते में ही आपको बहुत सारे दुकानें मिल जाती हैं । जहा आपको परांठा, मैगी और फल मिल जाएंगे।
इसके आलवा आपको जगह-जगह में बाथरूम भी मिल जाएंगे।

दोस्तो अब इसके बाद आप पहुच जाते है बेस केम्प, जहा सारे भक्तों के लिये रुकने और खाने पीने के लिये आश्रय बनाया गया है।

अब यही से केदारनाथ की दुरी मात्र 1 किलोमीटर की रह जाती है। बेस कैम्प- में ही बहुत सारे टेन्ट लगे हुए है जिनका किराया 400 रुपय/ व्यक्ति का देना होता है। इसके आलवा यहा पर गढवाल मंडल निगम लिमिटेड बना हुआ है जहा पर आप रुक सकते है।
यहा पर 3 गेस्ट हाउस बने हुए है । आप इन तीनों में से किसी एक रात के लिये रुक सकते है।

केदारनाथ यात्रा होटल बुकिंग 2022 | Kedarnath Yatra Hotel Room Booking Online

आप इन रुम की बूकिंग ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनो तरीके से कर सकते है। लेकिन ऑफ़ लाईन बूकिंग कराने के लिये 1 प्रतिशत भी चांस नही होता है की आपको वहा पर कोई भी रुम खाली नही मिलते है। इसलिए आप पहले से ही ऑनलाइन बूकिंग कर लीजिये ।
बूकिंग कराने के लिए आपकों गढवाल मंडल निगम लिमिटेड के वेबसाइट में जाकर बूकिंग कराना होता है।

इसके अलावा अगर आप मन्दिर के पास में ही रुकना चाहते है तो मन्दिर के पास ही बहुत सारे होटल और गेस्ट रुम बने हुए हैं ।

अगर आप बेस कैम्प में रुकते है तो आपको यहा पर खाने पीने के लिये 150 रुपय से 200 रुपय की थाली मिल जाती है।
और अगर मन्दिर के पास भी रुकते हैं तो आपको यहा भी 150 से 200 रुपय की खाने की थाली मिल जाती हैं ।

अगर आप बेस कैम्प शाम के 6 बजे पहुच जाते है तो आप अपना समान रख दीजिये और फिर आराम कर लिजिये।
और आराम करने के बाद चले जाईए केदारनाथ मन्दिर में दर्शन करने ।

केदारनाथ मंदिर दर्शन का समय | Kedarnath Temple Darshan Timing

केदारनाथ मंदिर दर्शन का समय सुबह 5 से रात 9 बजे तक है। शाम्ं को 6 बजे केदारनाथ मंदिर में आरती होती है।
आप भी आरती में जरुर जाए और केदारनाथ बाबा के दर्शन करिये। केदारनाथ बाबा के दर्शन्ं सभी भक्तों को बाहर से ही करने होते है क्योकिं शाम के 5 बजे के बाद किसी को अन्दर जाकर दर्शन करने की अनुमती नही होती। इसके लिये आप सुबह जल्दी उठिए और दर्शन करने के लिए लाईन में लगे । इसके लिये आपकों 3 से 4 घंटे भी लग जाते है। और बात करें प्रसाद की तो मंदिर के पास में ही आपकों प्रसाद चढ़ाने के लिये मिल जाता है।

यहा पर आपको 3 तरीके से प्रसाद मिल जाते है। एक 151 रुपय, 251 रुपय और 501 रुपय। आप अपने बजट अनुसार प्रसाद ले सकते है।

भीम शिला दर्शन | Kedarnath Bhimshila Darshan

केदारनाथ बाबा के दर्शन करने के बाद आप भीम शिला भी दर्शन करने जा सकते है। कहते है की जब 2013 में आपदा आयी थी तो इस शिला के वजह से ही मंदिर को कोई भी नुक्सान नही हुआ था इसलिए इसका नाम भीम शिला पड़ा। आपको इसके भी दर्शन कर लेने है।

इनके दर्शन करने के बाद आप चाहे तो भैरव बाबा के दर्शन कर सकते हैं । केदारनाथ से भैरव बाबा का रस्ता 1 किलोमीटर है तो आप पैदल भी जा सकते है। इतना करने पर आप वापस अपने बेस कैम्प में आ जाईए। इसके बाद वही केदारनाथ मंदिर से 8 किलोमीटर की दुरी पर वष्की तालाब । वहा जाकर भी आप उस झील के दर्शन कर सकते हैं । इसके लिये आपकों केदारनाथ मंदिर में 2 रात का नाइट स्टे करना पड़ेगा।

हरिद्वार दे केदारनाथ यात्रा का समय | Haridwar to Kedarnath Yatra

अगर आप केदारनाथ यात्रा का ट्रिप बना रहे हैं तो आपकों हरिद्वार को मिलाकर 5 रात का प्लान करना पड़ेगा।

पहले रात आप हरिद्वार रुकेंगे, दुसरी सोनप्रयाग, तीसरी केदारनाथ मंदिर, चौथी रात आप वापस आयेंगे और सोनप्रयाग में रुकेंगे और फिर पाँचवे दिन हरिद्वार में रुकेंगे।

दोस्तों जब आप केदारनाथ यात्रा की पैकिंग की तैयारी कर रहे हैं तो अपने साथ हमेशा रेनकोट और वूलन कपड़े जरुर रखे क्योकिं केदारनाथ यात्रा में कभी भी बारिश और कभी ठंड पड़ जाती है।

यह भी पढ़ें :

तिरुपति तिरुमाला बालाजी यात्रा | तिरुपति बालाजी के दर्शन कैसे करे 2022

हिंदू धर्म में संकट को हरने एवं कष्ट, बीमारी से मुक्ति दिलाने वाले एक मात्र ऐसे भगवान हैं जो इन सब से एक व्यक्ति को दूर रखता हैं तथा इनकी पूरे मन और श्रद्धा  से पूजा करने पर कोई भी विपत्ति इनके भक्त को छू भी नहीं सकती I और वो भगवान हैं तिरुपति तिरुमाला बालाजी महाराज I आइए पढ़ते हैं इस आर्टिकल में और समझते है इनके अवतार और चमत्कार को और साथ ही लोगों के प्रति इनकी श्रद्धा के बारे में I 

तिरुपति तिरुमाला बालाजी के दर्शन। Tirupati Balaji Ki Darshan

दक्षिण भारत के  मंदिर बहुत भव्य एवं प्रसिद्ध हैं तिरुपति बालाजी मंदिर सर्वाधिक मंदिरों में से एक हैं ये प्रभु वेंकटेश्वर बालाजी का मंदिर हैं जिन्हें विष्णुजी का अवतार माना जाता हैं ।ये आन्ध्र प्रदेश के चीतोंर ज़िले मे हैं ये दक्षिण में स्थित तालाब तिरुमाला के पास बना हैं इसके चारों तरफ पहाडियाँ शेषनाग के सात फ़नो के आधार पर सत्यगिरी कहलाती हैं I 

मंदिर का इतिहास

इस मंदिर का इतिहास 5 वी शताब्दी से शुरू होता हैं ये मंदिर सभी धर्मों के लिए खुला हुआ हैं भगवान बालाजी के मन्दिर को किसी ने नहीं बनाया हैं बल्कि ये मूर्ति स्वयं यहां पर प्रकट हुई थीं ।बालाजी के मूर्ति पर चोट का निशान हैं जहां औषधि के रूप में चंदन लगाया जाता हैं बालाजी के मूर्ति के सिर पर असली रेशमी बाल हैं इन बालों की विशेषता ये हैं कि इन बालों पर कभी उलझनें नहीं पड़ती, हमेशा साफ़ ही दिखाई पड़ती हैं । 

तिरुपति बालाजी  में करने वाला महत्वपूर्ण  दान कौन सा है?

दोस्तों इस मंदिर में केश दान की परम्परा बहुत ज्यादा प्रचलित हैं मन्नत पूरी होने पर लोग यहाँ पर अपने केश दान करते हैं और इसका एक गहरा अर्थ भी हैं कि अपने केश के साथ घमंड और बुराई को समर्पित कर देना लगभग 20,000 लोग अपने केश दान करते हैं । मंदिर की प्रतिमा को अगर ध्यान से सुना जाए तो इस मूर्ति के भीतर से समुद्र की लहरें सुनाई देती हैं । बालाजी की मूर्ति हमेशा नम रहती हैं मगर ऐसा क्यूँ हैं आज तक इसका पता नहीं चला हैं I 


तिरुपति बालाजी का प्रसाद

मंदिर में रोजाना 3 लाख लड्डू बनते हैं इस मन्दिर से 23 किलोमीटर दूर एक मंदिर हैं जहां लोग बहुत पुराने नियमों के तरीकों से रहते हैं उसी गाँव से लाये गये फूल,फल, घी, मक्खन आदि मंदिर में चढाए जाते हैं। इस गाँव का किसी को पता नहीं है और ना ही किसी भी व्यक्ति को वहाँ जाने की अनुमति हैं भगवान बालाजी के छाती में हमेशा लक्ष्मी जी विराजमान रहती हैं माता यहाँ पर रहती हैं इसका पता तब चलता हैं जब हर गुरुवार को बालाजी का पूरा श्रृंगार उतार कर उन्हें स्नान कराया जाता हैं और फिर उन पर चंदन का लेप लगाया जाता हैं जब चंदन का लेप हटाया जाता हैं तो हृदय पर माता लक्ष्मी कि छवी  उभर कर आती हैं I 

लोगों की मान्यता के अनुसार माने | Tirupati Se Aap Kya Samajhte Hain

दोस्तों आपकों जानकर हैरानी होगी कि यहां पर गर्भगृह में एक दीपक बिना घी,तेल के हजारों सालों से जल रहा हैं ये सब केसे होता हैं आज तक किसी को पता नहीं चला। पचाई कपूर को किसी साधारण प्रतिमा में लगाने से वो पथर धीरे-धीरे चटक जाता हैं लेकिन वेंकटेशवर भगवान का चमत्कार ही हैं जो पचाई कपूर को वेंकटेशवर प्रतिमा पर चढ़ाने पर इस प्रतिमा पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता हैं। अन्य मंदिरों की तरह यह भी भगवान को और भगवानों की तरह तुलसीपत्र चढ़ाया जाता हैं लेकिन उसे भक्तों को प्रसाद के रूप मे नहीं दिया जाता I पूजा करने के बाद उस तुलसीपत्र को मंदिर परिसर में मौजूद एक कुएं में डाल दिया जाता है, फिर उसको मुड़कर कभी देखा नहीं जाता हैं इस मंदिर में मांगी जाने वाली हर मन्नत पूरी होती है| मन्दिर के मुख्य द्वार के बायीं ओर एक छड़ी हैं ऐसा माना जाता हैं कि इस की छड़ी से बाल्यावस्था में इस छड़ी से बालाजी की पिटाई की गयी थी और उनकी ठुड्डी पर चोट लग गयी थीं इस कारणवश उनकी ठुड्डी पर शुक्रवार को चंदन का लेप लगाया जाता हैं ताकि उनका घाव भर जाए ,अगर जब आप बालाजी के गर्भ गृह में जाकर देखेंगे तो पाएंगे कि मूर्ति गर्भगृह के मध्य में स्थित हैं वही अगर गर्भगृह के बाहर आकर देखेगें तो ऐसा लगेगा कि मूर्ति दायी ओर स्थित है I भगवान की प्रतिमा को प्रतिदिन नीचे धोती और ऊपर साड़ी से सजाया जाता हैं । ऐसा मान्यता है कि बालाजी पर ही माता लक्ष्मी जी का रूप समाया हैं और इसी कारण से ऐसा करा जाता हैं I इस मंदिर पर जो भी पुष्प माला चढ़ाया जाता हैं उन्हें मूर्ति के पीछे ही फेंक दिया जाता हैं ऐसी मान्यता हैं कि इसे देखना अशुभ और पाप माना जाता हैं ।वेसे तो भगवान बालाजी की प्रतिमा एक विशेष चिकने पत्थर से बनी है मगर ये पूरी तरीके से जिवंत लगती हैं मन्दिर के वातावरण को काफी ठंडा रखा जाता हैं दोस्तों आपकों जानकर काफी हैरानी होगी कि बालाजी की मूर्ति का तापमान हमेशा 110 डिग्री F रहता हैं और मूर्ति को पसीना भी आता हैं जिसे पुजारी समय समय पर पोछते भी रहते है ।

दोस्तों क्या आप जानते हो कि ये मंदिर दुनिया के सबसे अमीरों  के मन्दिरों के गिनती में आता हैं पर आपको जानकर हैरानी होगी कि यह तिरुपति बालाजी गरीब है और कर्ज तले दबे हुए हैं जी हाँ दोस्तों आपने बिल्कुल सही सुना है ये मन्दिर तो अमीर हैं पर भगवान गरीब है । 

तिरुपति बालाजी के दर्शन कैसे करे 2022 | TTD Online Room Booking | TTD Online Tickets

तिरुपति बालाजी का मंदिर सबसे अमीरों मन्दिरों में से एक हैं अगर आप यहाँ हर महीने कभी किसी भी दिन जाते हो तो आपको यहाँ पर भक्तों की हमेशा भीड़ ही दिखाई देगी , अगर आप यहां किसी भी प्लानिंग के बिना जाते है तो आपको कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता हैं आपके 3 या 4 घण्टे दर्शन टिकट खरीदने में ही निकल जाएंगे और होटल मे रूम मिलना भी मुश्किल होता हैं क्योंकि 4 या 5 घण्टे तो दर्शनं की लाइन में खडा रहना पड़ता है इन सब तकलीफों के बाद  स्टेमिना खत्म हो जाता है ।इसलिए जब भी बालाजी के दर्शन करने जाए तो हमेशा प्लानिंग के साथ जाए I 

अगर आप दर्शन के लिए जाए तो कौन सी रैल जाती है तिरुपति बालाजी के लिए तो उसका पता आप वेबसाइट के www.irctc.co.in.com पर जाकर भी पता कर सकते है । कुछ ट्रेन तिरुपति पर जाकर रुकती हैं और कुछ ट्रेन तिरुपति से पहले 5 किमी रेनीकुन्ठा नाम का स्टेशन लगता हैं वहाँ पर रुकती हैं रैल की सूची देख कर आप पता कर सकते हैं अगर आपको सीधे तिरुपति रुकने वाली रैल मिलती हैं तो बहुत अच्छा होगा ।वर्ना रेनीकुन्ठा नाम स्टेशन भी रैल बुक करा सकते हो, वहाँ से भी आपको प्राइवेट बस या ऑटो मिल जाएगी I दोनों बालाजी मंदिर आने और जाने का टिकट कन्फर्म करा ले I

आपकों होटल में रुकना है उसी हिसाब से टिकट बुक करा ले I दूसरी बात यह है कि बालाजी के दर्शन करने के लिए ही बहुत ज्यादा समय लग जाता है इसका दूसरा तरीका यह है कि आप स्पेशल एंट्री दर्शन [ttd 300 rs ticket online booking] का, आप 300 रुपये देकर भी बालाजी के दर्शन कर सकते हों I 4 से 5 घन्टों में भी आप बालाजी के दर्शन कर सकते हो इसके लिए आपको 90 दिन पहले या 3 घण्टे पहले एडवांस्ड में भी टिकट बुक करा सकते हो I 

तिरुपति बालाजी यात्रा स्पेशल टिकिट | TTD 300 Rs Ticket Online Booking | तिरुपति बालाजी यात्रा

स्पेशल प्रवेश के लिए आपको तिरुपति तिरुमाला जी की वेबसाइट https://www.tirumala.org/ पर जाना हैं सबसे पहले आपको साईन अप करना होगा फिर वहाँ जाकर पास वर्ड बनाना होगा, फिर वहाँ  लॉगिन करके आपके सामने होम पेज खुल जायेगा I वहाँ पर सर्विस पर आपको स्पेशल एंट्री दर्शन क्लिक करना होगा,आप जिस दिन से बालाजी के दर्शन करना चाहते हो उस दिन का तारीख सेलेक्ट कर ले और उस दिन का टाइम देख लें और आपकों जिस दिन दर्शन करना हैं सेलेक्ट कर लीजिए I और फिर आगे कन्टिन्यू करे I और इसके आगे आपकों जो जो प्रोसेस  करने को बोले आगे वो वो करते जाएये I लास्ट में पेमेंट का ऑप्शन आयेगा उसको पूरा कीजिए फिर इसके बाद आपका स्पेशल एंट्री दर्शन बुक हो जायेगा I उसका दो कॉपी प्रिंटआउट करके रख ले I होटल में रूम बुक करने के लिए 90 दिन पहले या 1 दिन पहले भी बुक कर सकते हों I रूम बुक करने का प्रोसेस जेसे स्पेशल एंट्री दर्शन के तरह ही हैं I आप  https://www.tirumala.org/  पर जाकर accommodation में जाकर क्लिक करके बुक कर सकते हों I 

क्या है TTD | TTD Full Form

दोस्तों अगर आप तिरुपति तिरुमाला बालाजी के दर्शन के लिए ऑनलाइन बुकिंग करते है तो आपको अब https://www.tirumala.org/ वेबसाइट पर जाना होता है | लेकिन पहले इसके लिए आपको ttdsevaonline.com वेबसाइट पर जाना होता था | जोकि अब काम नहीं कर रही है | इस वेबसाइट में TTD का मतलब या फुल फॉर्म होता है “Tirumala Tirupati Devasthanams” | यह तिरुपति तिरुमाला बालाजी अधिकारिक वेबसाइट है |

तिरुपति बालाजी दर्शन के सफर करते समय ध्यान रखने वाली बातें | Tirupati Balaji Yatra Useful Tips

  • जब भी रैल में सफ़र करे तो उस दौरान पीने का साफ बोतल का पानी ही लेकर जाए I
  • स्टेशन में बिकने वाली तेल से बनी चीजें आपकों नहीं खाना हैं और आपके साथ अगर बच्चे जा रहे हैं तो उनको पहले ही समझा देना है कि किसी भी अनजान व्यक्ति से कुछ ना ले I
  • अगर आप इन सब बातों का ध्यान रखते है तो आपकी सेहत भी अच्छी रहेगी और आपकों दर्शन के दौरान मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा I 
  • दूसरी बात आपकों वहां पहुंच कर सबसे पहले अपने बुक किये हुए रूम को देखना है फिर आराम करना है क्योंकि सफर में आप इतना थक जाएंगे कि आप बस से उतरते ही आराम करने का मन करेगा I 
  • बस से उतरते ही बगल में CRO का ऑफिस हैं वहाँ जाकर आपकों रूम बुकिंग का प्रिंट आउट दिखाना है या 500 रूपए भरना पड़ता है I CRO ऑफिस का बाबु आपका एक प्रिंट आउट कॉपी रख लेगा और दूसरा आपकों दे देगा इससे आपको पता चल जाएगा कि आपकों कौन से काम्प्लेक्स में रूम मिला हैं ।
  • CRO ऑफिस के बगल में ही पूछताछ काउन्टर है वहाँ से आपकों अपने रूम का पता चल जाएगा I वहाँ के लोगों को बहुत कम हिन्दी और अंग्रेजी आती हैं तो पूछताछ केंद्र में ही सही रहेगा I 

तिरूपति बालाजी दर्शन का समय | Tirupati Tour Timing | Trip to Tirupati Balaji Darshan Timing

मंदिर सुबह 6 बजे से रात के 9 बजे तक खुलता हैं ।

अगर आप वहाँ जाते हैं तो आपको कोरोंना का ध्यान रखते हुए पूरा टीकाकरण होना आवश्यक हैं ।और साथ में मास्क और सेनिटायजर भी ले जाना चाहिए और हो सके तो 2 गज की दूरी भी अपनाये तो ज्यादा सुरक्षित रहोगे I

तिरूपति बालाजी टोल फ्री नम्बर | TTD Toll Free Number | Tirupati trip Helpline Number

 1800 425 4141

यह भी पढ़ें :

श्री कृष्ण के पावन जन्मभूमि मथुरा की यात्रा | Mathura Tourist Places in Hindi

जय श्री राम मित्रो | यात्रा 99 में आपका स्वागत है | आज की पोस्ट में हम आपको भगवान् श्री कृष्णा की जन्मभूमि मथुरा नगरी की यात्रा (Mathura Tourist Places in Hindi) की जानकारी देने जा रहे हैं | जैसा की आप जानते हैं की हम सब भारतवासी को जो एक दूसरे को बांधे कर रखता है | जो हमें मानवता का एहसास दिलाता है | जो एक मनुष्य के प्रति दूसरे मनुष्य के लिये सदभावना रखता हैं | जो हमे एक धर्म में रहकर मानवता की सीख देता है | वो है हिन्दू धर्म । और सब भारतीय वासी हिन्दू धर्म में भगवान को माना जाता है, उनकी पूजा की जाती है, उनके नाम का जाप किया जाता है | ताकि हमें मनुष्य के रूप से शांति से मोक्ष मिल सके।इसके लिये लोग भगवान के दर्शन करने उनके दरबार में जाते हैं । हमारे भारत  में  बहुत से ऐसी जगह हैं जहाँ लोग भगवान के दर्शन करने जाते है और वो है श्री कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा । आज हम आपको बतायेंगे की लोग क्यों मथुरा जाते हैं श्री कृष्णा के दर्शन के लिये। मथुरा जाने का सही समय (mathura temperature), मथुरा के आस पास देखे जाने वाले पौराणिक स्थल (mathura temples) आदि |

यात्रा का इतिहास | Mathura History in Hindi

उत्तर प्रदेश में यमुना नदी के किनारे बसी भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा की गणना मोक्ष देने वाली सात पीढ़ियों में करी गयी है |भगवान विष्णु ने इसे अपना सर्वाधिक प्रिय क्षेत्र बताया है | जिस प्रकार काशी में प्रमुख रूप से शिव की पूजा होती है | उसी प्रकार मथुरा भी विष्णु का पूजनीय स्थल है |  मथुरा के निकट ही मधुवन में पहले असु, मधु और लवण का शासन था | इसी मधू के नाम पर मधुर या मधुर्पूर या मधुवन नगरी बसी । ऐसा कहा जाता है की तीर्थ स्थल पर किया पाप अमृत होता है, परंतु इसके विपरीत ही मथुरा में किया पाप मथुरा में ही नष्ट हो जाता है और यही इस तीर्थ स्थल की महानता है ।

इस संबंध में निम्न दो कथायें प्रसिध्द है, मथुरा के निकट मधूवन में पहले असुर, मधू और लवण का शासन था | आसपास के क्षेत्र में इनका भारी उत्पात था | भगवान राम के छोटे भ्राता शत्रुघ्न ने लवण को मारकर इस नगरी को असुरों से मुक्त कराया । पुराणों में विधिवंस के इतिहास के अनुसार अन्धक की वंश्जा देवकी और विष्णु के वंशज वासुदेव से जिनका पुत्र हुआ वो नारायण के अवतार भगवान श्री कृष्ण थे | तथा इसीलिए इसे श्री कृष्ण के जन्मभूमि माना जाता है | मनु के पौत्र ध्रुव का जन्म इसी स्थल पर भगवत साक्षात्कार का तप करके हुआ था | मथुरा एक प्राचीन नगर है और इसकी मान्यताएं भी प्राचीन है आज भी यहाँ के घर और मंदिर प्राचीन सभ्यता से प्रेरित है |पर  वर्तमान में आधुनिकता के प्रभाव भी इस नगर में पड़ने लगा है मथुरा के द्वारिकाधीश मंदिर यमुनाघाट के समीप संकरे गलियों में मिष्ठान्न की दुकानें प्रसिध्द है। 

निधिवन का रहस्य क्या है | Mathura Nidhivan Information Hindi

भले ही बहुत से लोग मथुरा नही गये होंगे परंतु उन्होनें यहाँ के निधिवन के बारे में तो जरुर सुना ही होगा । निधिवन के अन्दर रंगमहल भी है | दावा होता है की हर सुबह रंगमहल को खोला जाता है तो वहाँ श्री कृष्ण के मौजूदगी के निशान मिलते हैं | दातुन, लडू, पान और एक लौठा पानी जिसे रंगमहल के अन्दर सात तालों के अन्दर बन्द कर दिया जाता है | मगर सुबह सब कुछ  बदला रहता है | दातुन चबा हुवा, लडू टूटे हूई, पान चबाय हुआ ,पानी भरा हुआ लौठा गिरा हुआ मिलता है | सौलह सिंगार में चूडि बिन्दिया सब बिखरी हुवी मिलती है । ऐसा माना जाता है की निधिवन के रहस्य को लेकर वहाँ के लोग सब जागरुक है, इसलिये शाम होते ही सब लोग अपने घर चले जाते है | यहाँ तक की वहाँ पर एक परिंदा तक भी नही बैठता उस वन में | आसपास के लोग शाम के वक़्त अपने खिडक़ी दरवाजे सब बन्द कर देते है ताकि उनकी नजर गलती से भी उस वन में ना पड़े। क्युकि ऐसा बोला जाता है की उस निधिवन में श्री कृष्ण अपनी गोपियों के संग रात को रास लीला रचाते हैं ।और आज तक उनके इस रास लीला को देखने के लिये रात को जो भी  चोरी छुपे रुका है वे सब सुबह अपनी सुद्बूध खो बैठता है और 2 या 4 दिन में ही मुस्कुरा कर अपने प्राण त्याग देता है। 

मथुरा यात्रा करने ने का सही समय | Mathura Weather for Travel | Mathura Weather

अगर आप भी श्री कृष्ण के दर्शन करना चाहते है सोच रहे है की किस समय अच्छा रहेगा मथुरा जाना तो हम आपको बता दे की मथुरा जाने का सही समय है फरवरी-मार्च और सितंबर-नवंबर के बीच होता है इस समय आपको ज्यादा गर्मी और कडाके ठंड को झेलना नही पड़ेगा। 

यात्रा में जाने के लिये स्वास्थ्य का ध्यान ?

यात्रा में जाने से पहले आप ये जरुर ध्यान रखे की अगर आप किसी भी तरह की दवाईया खाते है तो यात्रा में जाने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह जरुर करे।और साथ में दवाईया लेकर जाये। 

यात्रा के लिये सबसे अच्छा मार्ग?

श्री कृष्ण की जन्मभूमि मंदिर मथुरा शहर के बीचों –बीच में स्थित है यह मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन से सिर्फ 4 किमी के दूरी पर है मथुरा आप बस, कार या रिक्शा के जरिये आसानी से पहुँचा जा सकता है। 

मथुरा में जाने के लिये होटल/धर्मशाला/होम स्टे | Mathura Hotels

आपको मथुरा में रहने के लिये 800 से 1200 रुपय प्रति दिन के लिये कमरा मिल जाएगा परंतु अगर आप जाने से पहले बुक कर लेते है तो आपको कमरा निश्चित हो जाएगा। 

मथुरा में आस पास के पर्यटन स्थल | Mathura Tourist Places in Hindi | Mathura Temple

मथुरा में आपको भगवान के दर्शन उनसे जुड़ी आस्था और धर्म का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।अगर आप मथुरा जायें तो अपने सुविधा के अनुसार इन जगह पर भी घुमने जायें ।

1. कृष्ण जन्मभूमि मंदिर

2. द्वारकदीश मंदिर

3. गोवर्धन पर्वत

4. बाँके बिहारी मंदिर

5. कुसुम सरोवर

6. मथुरा संग्रहालय 

7. विश्राम घाट 

8. बिड़ला मंदिर

9. कंस किला

10. जय गुरुदेव मंदिर

11. पोटारा कुंड 

12. राधा कुंड

13. रंग भूमि 


यात्रा की तैयारी  कैसे करे ?

यात्रा करने के लिये आपको 2 या 4 दिन का समय लग भी सकता है | इसके लिये आपको अपने साथ वो सभी जरुरत की चीजें लेकर जाना पड़ेगा | जो आपको रोज चाहिये होता है | आप अपने सुविधा अनुसार ट्रिप तय कर सकते है | अगर आप खुद के वाहन से जाना चाहते है तो बहुत अच्छा है परंतु आपके पास खुद का वाहन नही है तो आप यात्रा पर सुविधा अनुसार रिक्शा,आटो आदि की मदद ले सकते हो।


यात्रा ऑनलाइन पंजीकरण ?

अगर आप भी श्री कृष्ण के दर्शन करना चाहते हो तो कोरोना के चलते आपको भी नियमों का पालन करना पड़ेगा । और ऑनलाइन पंजीकरण करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही आपको करोना का टीकाकरण करना अनिवार्य होगा और आपको सभी नियमों का पालन भी करना होगा।तथा मास्क और सेनिटाइज़र भी साथ लेकर जाये और जहाँ ज्यादा भीड़ हो वहाँ से दूरी बनाये रखे। 

यात्रा के दौरान सावधानियाँ ?

यात्रा के दौरान अपनी चीज़ो का ध्यान रखे और किसी भी अंजान व्यक्ति से किसी भी तरह की चीजें ना ले।और हो सके तो अपने समान की खुद ही जिम्मेदारी ले किसी के भरोसे ना रहे।

निष्कर्ष

मित्रों आज हमने आपको श्री कृष्णा जी की जन्मभूमि मथुरा की यात्रा के सम्बन्ध में बताया है | आशा करते हैं की आपको हमारी ये रोचक जानकारी जरुर पसंद आई होगी | अगर आपके मन में अभी भी कोई सवाल हो तो हमें जरुर लिखें | और इस पोस्ट को अपने मित्रो के साथ सोशल मीडिया पर जरुर शेयर करें |

हम अपने ब्लॉग यात्रा 99 डॉट कॉम में ऐसी ही धार्मिक और पर्यटन सम्बन्धी जानकारी पोस्ट करते रहते हैं इसीलिए हमें सब्सक्राइब जरुर करें और हमारे सोशल मडिया प्लेटफार्म फॉलो करें |

जय श्री राम

FAQ

1. मथुरा से महत्वपूर्ण स्थलों की दूरी | mathura to vrindavan distance

स्थान दूरी समय
वृन्दावन (Mathura Vrindavan)
Mathura to Vrindavan Distance
15.1 km via NH19/NH 4427 min
दिल्ली से मथुरा
Delhi to Mathura Distance
183.0 km via Yamuna Expy3 hr 18 min 
आगरा से मथुरा की दूरी
Agra to Mathura Distance
 56.7 km via NH19/NH 441 hr 17 min
जयपुर से मथुरा की दूरी
Jaipur to Mathura Distance
222.1 km via NH214 hr 14 min 

2. Mathura PIN Code

281001

माता वैष्णो देवी यात्रा कैसे करें | Mata Vaishno Devi Yatra Kaise Kare

सनातन धर्म में तीर्थ यात्रा की बड़ी मान्यता है। भारत चारों ओर से तीर्थों से ही घिरा देश है। एवं सभी तीर्थों की अपनी-अपनी मान्यता एवं महत्व हैं। उन्हीं में से एक तीर्थ है देवी वैष्णो के धाम की यात्रा। दुनिया भर के सभी सनातनी वैष्णो देवी की यात्रा को लेकर उत्सुक एवं जिज्ञासु होते हैं। तथा अवसर मिलने पर मां के द्वार जाने का सौभाग्य भी प्राप्त कर ही लेते हैं। लेकिन किसी भी यात्रा को करने के लिए उसके विषय में पूर्ण जानकारी होनी अत्यंत आवश्यक है। खासकर वैष्णो देवी की यात्रा अत्यंत ही दुर्गम होने के साथ मनोहारी एवं आनंद पूर्ण होता है। तो आज के इस लेख में हम जानेंगे हिंदू धर्म के इस महान तीर्थ वैष्णो देवी की यात्रा के विषय में। जिससे कि यदि आप भी यह यात्रा करने वाले हैं तो आपको इसके विषय में पूर्ण अनुभव प्राप्त हो जाए। एवं किसी प्रकार की परेशानी ना उठानी पड़े। तो आइए जानकारियों का यह सिलसिला प्रारंभ करते हैं।

माता वैष्णो देवी की यात्रा का परिचय | Vaishno Devi Temple Introduction | वैष्णो देवी की चढ़ाई कितनी है

माता भगवती श्री वैष्णो देवी [Jag Janani Maa Vaishno Devi] का मंदिर जम्मू कश्मीर में स्थित कटरा नाम के एक नगर से अनुमानतः 12 किलोमीटर दूरी पर त्रिकूट पर्वत पर स्थित है। एवं देवी माता त्रिकूट पर्वत पर लगभग 5200 फीट की ऊंचाई पर मंदिर में विराजमान हैं। जम्मू क्षेत्र का सर्वाधिक सम्मानित एवं मान्यता प्राप्त यह‌ मंदिर है। यहां मां को अलग-अलग नामों से पुकारते हैं भक्त कोई त्रिकुटा माता तो कोई वैष्णो देवी तथा कोई माता रानी के नाम से पुकारते हैं। भगवान वेंकटेश्वर के पश्चात वैष्णो देवी का ही यह मंदिर आता है जिसके दर्शन करने सर्वाधिक मात्रा में दूर-दूर से भक्त जन आते हैं। माता के प्रहरी के रूप में साक्षात श्री हनुमंत लाल विराजमान हैं। तथा यहीं माता के परम भक्त श्री भैरवनाथ का भी मंदिर है। जिनकी पूजा प्रथम में करने के पश्चात माता की पूजा की जाती है। मंदिर का संचालन सही ढंग से करने हेतु श्री माता वैष्णो देवी तीर्थ मंडल नाम की संस्था तत्पर रहती है।

माता वैष्णो देवी की गुफा दुनियांभर में बहुत प्रसिद्ध है |

क्या है वैष्णो देवी का इतिहास | Hitory of Maa Vaishno Devi Mandir

देवी वैष्णो से जुड़ी एक प्राचीन कथा जिसकी हिंदू धर्म में काफी मान्यता है। देवी के अवतार से जुड़ी इस कथा को आइये संक्षिप्त में जानते हैं।रत्नाकर नाम के एक बड़े ही सदकर्मी एवं धार्मिक राजा थे। किंतु दुर्भाग्यवश उनके कोई संतान नहीं थी वे राजा एवं रानी देवी के भक्त थे। देवी ने उन पर कृपा कर दी एवं स्वयं ही उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। जिस पुत्री का नाम त्रिकुटा रखा गया। इन्हें तीनों देवियों देवी दुर्गा, देवी लक्ष्मी, एवं देवी सरस्वती का सम्मिलित रूप माना जाता है। मान्यता है कि त्रिकुटा इन्हीं तीन देवियों का सम्मिलित अंश है। त्रिकुटा के जन्म से पूर्व ही उसके माता-पिता से देवी ने स्वप्न में यह वचन ले लिया था कि वह अपनी पुत्री को कोई भी कार्य करने से नहीं रोकेंगे। एवं उनके जन्म लेने का उद्देश्य पूर्ण होने में बाधा नहीं बनेंगे। तथा आगे चलकर उन्हीं त्रिकुटा का नाम वैष्णवी पड़ा। वैष्णवी ने मात्र 9 वर्ष की आयु में ही अपने माता-पिता से तपस्या करने की आज्ञा मांगी। एवं माता पिता वचनबद्ध होने के कारण ना चाहते हुए भी उन्हें तप करने की आज्ञा देते हैं। एवं जब श्री राम लक्ष्मण पूरी वानर सेना के साथ सीता की खोज करते हुए उन्हीं गुफाओं से होकर गुजरते हैं तो भगवान राम की दृष्टि देवी वैष्णवी पर पड़ती है। एवं वे उनसे उनके तप करने का कारण पूछते हैं तथा वरदान मांगने को कहते हैं। तब देवी वैष्णवी ने भगवान राम को अपनी तपस्या का प्रयोजन बताया कि वह उन्हें अपने वर के रूप में प्राप्त करना चाहती हैं तथा वे उनकी यह प्रार्थना स्वीकार करें। किंतु भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम एवं एक पत्नी व्रत धारण किए होने के कारण उनकी प्रार्थना स्वीकार नहीं करते। एवं उन्हें कलयुग तक प्रतीक्षा करने की आज्ञा देते हैं। एवं यह वचन देते हैं कि कलयुग में जब वे कल्कि अवतार धारण करेंगे तो देवी वैष्णवी की इच्छा को पूर्ण करेंगे तब तक के लिए उन्हें उत्तर भारत के पर्वत श्रृंखलाओं पर निवास करने एवं अनेकों अनेक भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए विराजमान होने को कहा। देवी त्रिकुटा के उस पर्वत पर निवास करने के कारण पर्वत का नाम त्रिकूट पर्वत पड़ा। एवं सीता हरण की सूचना देवी वैष्णवी को पड़ने पर उन्होंने भगवान राम के विजय के लिए 9 दिनों तक मां दुर्गा के नौवों स्वरूपों की आराधना करती हैं। इसी कारण नवरात्रि के इन 9 दिनों में जगह जगह रामायण पाठ एवं रामलीला का आयोजन होता है। तथा देवी के व्रत की सफलता के साथ दसवें दिन दशहरा का त्योहार मनाया जाता है। जोकि देवी वैष्णवी की मनोकामना की सफलता का सूचक है। इस दशहरे में भगवान राम की विजय एवं दशानन लंकेश की हार का आनंद मनाया जाता है।

वैष्णो देवी की यात्रा पर जाने का उचित समय कब है | Vaishno Devi Kapat Open | How to Visit Vaishno Devi

देवी के धाम की यात्रा के लिए सबसे सुविधाजनक समय गर्मियों का होता है। इस वक्त पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम अनुकूल रहता है। जबकि ठंडे या बरसात के मौसम में जाने पर प्रतिकूल मौसम का भी सामना करना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त गर्मी की छुट्टियों में अथवा देवी से जुड़े किसी त्योहार आदि में नवरात्रों में। यहां भक्तों ज्यादा भीड़ लगती है इसी कारण दर्शन की बारी आने में भी देर होती है।

मौसम के अनुसार करें तैयारी | Shri Mata Vaishno Devi Weather | Temperature in Vaishno Devi

जिस मौसम में यात्रा पर जा रहे हो उस मौसम के अनुकूल अपनी पैकिंग अवश्य कर लें। जिससे कि आपको परेशानी ना हो ठंड में जा रहे हो तो गर्म कपड़े आराम देय जूते साॅल दस्ताने इत्यादि।एवं गर्मियों में जा रहे हो तो हलके वस्त्र लेकर जाना उचित है। एवं मानसून के समय में इस यात्रा को करने वालों को अपने साथ छाता तथा बरसाती कपड़े (रेनकोट) साथ ले जाने चाहिए।

क्या-क्या व्यवस्थाएं प्राप्त हो सकती है वहां तक पहुंचने के पश्चात:-

भवन अथवा मुख्य परिसर में पहुंचने के पश्चात वहां किराए पर अथवा निशुल्क रहने की व्यवस्था प्राप्त हो जाएगी। तथा अपने सामान इत्यादि रखने हेतु क्लॉक रूम, चिकित्सा के लिए चिकित्सालय, एवं भोजन हेतु शाकाहारी रेस्टोरेंट भी मौजूद है। इसके अतिरिक्त प्रसाद एवं कुछ स्मृति चिन्ह बेचने वाली दुकानें भी मौजूद है।

यात्रा के लिए स्वास्थ्य अच्छा होना आवश्यक है |

यूं तो इस यात्रा को करने हेतु किसी विशेष स्वास्थ्य सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं। किंतु फिर भी क्योंकि यह धाम काफी ऊंचाई पर है। एवं इसे स्वस्थ एवं पुष्ट व्यक्ति ही कर पाने में सक्षम हो सकते हैं। अतः यह ख्याल रखें कि ह्रदय रोग, रक्तचाप संबंधी समस्या, सिर दर्द सिर का घूमना, सांस फूलना इत्यादि जैसी समस्या ना हो। अथवा कई बार ऐसी छोटी समस्याएं ऊंचाई व अधिक गर्मी के कारण भी हो जाती हैं। ऐसे में आपको यही सलाह दी जाती है कि जरा ठहर ठहर कर अपनी यात्रा पूर्ण करें। तथा पर्याप्त मात्रा में समय-समय पर भोजन पानी ग्रहण करते रहे।

वैष्णो देवी यात्रा के लिए सुगम मार्ग | Way of Vaishno Devi Mata Temple | Yatra Kaise Karen

दिल्ली के अतिरिक्त अन्य कई राज्यों के शहरों से भी जम्मू के कटरा तक डायरेक्ट ट्रेन चलती है। आप अपने नजदीकी शहर से कटरा तक की यात्रा ट्रेन से कर सकते हैं। उसके पश्चात कटरा से आप अपनी सुविधा के अनुसार कोई व्यवस्था करके त्रिकूट पर्वत तक पहुंच सकते हैं। अपनी इच्छा होने पर कटरा से मां के पहाड़ियों [katra to vaishno devi] तक पैदल भी जा सकते हैं।

कोरोनावायरस से त्रस्त होने पर भारत के प्रायः सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए थे। एवं यात्राएं रोक दी गई थी। क्यों कि चूंकि अब स्थिति में सुधार आ चुका है। तो यह यात्राएं पुनः प्रारंभ कर दी गई है। एवं इसी के अनुसार वैष्णो देवी द्वार खुल गए हैं। एवं भक्तों के लिए यात्रा भी प्रारंभ हो चुकी है 2021 नवरात्रि प्रारंभ होने के कारण। भक्तों की सुविधाओं का ख्याल रखते हुए सेवाएं और बढ़ा दी गई हैं।

वैष्णो देवी यात्रा के लिए तैयारी कैसे करें | How to Travel Vaishno Devi

यदि देवी के धाम की यात्रा करने की लिए आप भी उत्सुक हैं। तो इसके लिए पूर्ण तैयारी अवश्य कर लें। सर्वप्रथम तो अपनी टिकट बुकिंग समय पर करवा लें। इसके पश्चात मौसम के अनुरूप वस्त्र इत्यादि की पूर्ण व्यवस्था अपने साथ ही लेकर जाएं। एवं क्योंकि परिसर तक पहुंचने के पश्चात आपको व्यवस्थाएं प्राप्त हो सकेंगी खाने पीने की। इससे पूर्व के लिए आपको अपने साथ उचित मात्रा में कुछ भोजन पानी की व्यवस्था भी लेकर चलनी चाहिए। एवं यात्रा काफी दुर्गम है जितना संभव हो सके कुछ संगी साथियों के साथ ही इस यात्रा को पूर्ण करना चाहिए। जिससे कि सभी एक दूसरे का ख्याल रखते हुए। एक दूसरे का हौसला बढ़ाते हुए इस कठिन यात्रा को सरलता से पूर्ण कर सकें।

माता वैष्णो देवी टेम्परेचर | Mata Vaishno Devi Temperature

हम सभी जानते हैं की माता देवी जी के दर्शन करने के लिए हमें पहाड़ों से होकर जाना होता है | और पहाड़ों का मौसम बहुत अलग होता है | यहाँ कभी भी तेज़ बारिश हो जाती है और कभी भी घने बदल छा जाते हैं और कभी भी तेज हवाएं चलने लगती हैं | इसीलिए जब भी आपको माता के दर्शन करने जाना है तो आपको मौसम की जानकारी (vaishnodevi temperature) जरुर होनी चाहिए |

वैसे तो माता का दरबार पूरे वर्ष खुला रहता है | लेकिन गर्मियों के मौसम में जाना अच्छा रहता है | आप फरवरी महीने से अक्टूबर महीने के बीच कभी भी अपनी यात्रा कर सकते हैं | लेकिन आपको बरसात के मौसम में जाना चाहते हैं तो आपको बहुत सावधानी बरतनी होती है | क्योंकि बरसातों में पहाड़ों के खिसकने कर भय लगा रहता है | और एक बात आपको ध्यान रखनी चाहिए की आप कभी भी माता वैष्णो देवी जी के दर्शन करने जाएँ अपने साथ गर्म कपडे, टोपी, कम्बल, रेन कोट आदि जरुर लेकर जाएँ | क्योंकि वहां का मौसम हमेशा बदलता रहता है |

माता वैष्णो देवी आरती लाइव कैसे देखें | vaishno devi aarti live from bhawan today

अगर आप वैष्णो देवी जी की आरती लाइव देखना चाहते हैं तो आप इन्टरनेट की सहायता से अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर इनके दर्शन कर सकते हैं | लाइव आरती देखने के लिए यहाँ क्लिक करें |

अमरनाथ यात्रा की जानकारी | Shri Amarnatha Temple Yatra Guide

जय श्री राम भक्तों | यात्रा 99 में आपका एक बार फिर से स्वागत है | जैसा की आप जानते हैं कि हम अपने ब्लॉग में देश – विदेश की सभी धार्मिक और प्रसिद्ध यात्राओं की शानदार जानकारी पोस्ट करते हैं | उसी क्रम में आज हम आपके लिए बाबा श्री अमरनाथ यात्रा (Amarnath Temple) की महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आये हैं | इस यात्रा की जानकारी इस ब्लॉग को बनाने वाले जितेन्द्र कुमार अरोरा जी ने स्वयं लिखी हैं | क्योंकि उन्होंने सन 2014 में श्री अमरनाथ यात्रा पूरी की थी | उन्हें यात्रा करना और अपने खुद के अनुभव को शेयर करना बहुत पसंद है | इसीलिए वह स्टेप बाई स्टेप आपको यहाँ इस पवित्र यात्रा की जानकारी देने जा रहे हैं |

  1. श्री अमरनाथ यात्रा के लिए जाने से पहले रजिस्ट्रेशन (Amarnath Yatra Registration) करवाना होता है। हमारे देश के बहुत सारे बैंकों जैसे यस बैंक आदि में रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरे गए थे। रजिस्ट्रेशन के दौरान ही मेडिकल चेकअप करवाना होता है, उसके बाद ही बैंक आपको पूरा रजिस्ट्रेशन कार्ड देता है। इस कार्ड को आपको पूरी यात्रा  में चेकिंग के लिए साथ रखना होता है।
  2. अमरनाथ यात्रा के लिए यात्रियों को शारीरिक रूप से स्वस्थ होना बहुत आवश्यक है , क्योंकि श्री अमरनाथ यात्रा के दौरान लगभग 14 ,800 फिट की उँचाई तक जाना और आना पड़ता है। 
  3. श्री अमरनाथ यात्रा के समय जरुरी और आवश्यक दर्द निवारक दवाइयों को साथ ले जाना बहुत जरुरी है। जैसे मरहम, गलूकोज़ , पेन किलर, विक्स, मूव, वेसलीन , बोरो प्लस आदि. 
  4. श्री अमरनाथ यात्रा जाते  समय गरम कपड़ो को भी ले जाना बहुत जरुरी है।  अपने साथ ऊनी कपडे, रेन कोट, फुल गर्म इनर, मफरल, मंकी कैप, अच्छे क्वालिटी  के स्पोर्ट्स शूज़ आदि , धुप से बचने के लिए एक हेट भी रख सकते है। साथ में एक लाठी जिसके नीचे लोहे की नोक लगी हो पहाड़ों और बर्फ में चलने में सहायक होती है। 

अमरनाथ यात्रा का विवरण | Amaranatha Temple Travel Guide | Amarnath Trek Distance

श्री अमरनाथ जी यात्रा का मुख्य रास्ता जम्मूतवी से शुरू होता है, यहाँ से आप सड़क या वायुयान   से जम्मू  जम्मू उधमपुर, कूद, पत्नी टॉप, बटोट, रामवन, बनिहाल, जवाहर टर्नल, खानेबल और अनंतनाग होते हुए पहलगांव पहुंचा जा सकता है,

 यात्रा के विभिन्न चरण | Amarnath Yatra Route

  1. प्रथम चरण -पहलगांव से चंदनवाड़ी 16 किमी की यात्रा पैदल या छोटी कार, बस आदि से पूरी की जा सकती है। चंदनवाड़ी लगभग 6500 फ़ीट की उचाई पर स्थित है, पैदल 5 या 6 घंटे में पूरी की जा सकती है और कार आदि से 1  घंटे में पहुंचा जा सकता है। 
  2.  दूसरा चरण – चंदनवाड़ी से पिस्सूटॉप की दूरी 3 किमी है, जो की 10600 फ़ीट की उचाई पर है, यहाँ की यात्रा 2 से 3 घंटे में पूरी की जा सकती है। यात्रा में मुख्य आकर्षण पिस्सूटॉप घाटी है, जो सर्पाकार है और बर्फ से ढकी है। 
  3. तीसरा चरण- पिस्सूटॉप से शेषनाग की यात्रा 8 किमी की है, जिसकी उचाई 11630 फ़ीट है, इस यात्रा को ४ से 5 घंटे में पूरा किया जा सकता है . 
  4. चतुर्थ चरण – शेषनाग से महागुनस की दूरी लगभग 6 किमी है,  महागुनस पर्वत की चढ़ाई 3 से 4 घंटे में पूरी की जा सकती है.   जिसकी उचाई 14800 फ़ीट है .
  5. पांचवा चरण – महागुनस से पोषपत्री की दूरी 1 किमी है, जो आधे घंटे में पूरी की जा सकती है .
  6. छटा चरण -पोषपत्री से पंचतरणी की दूरी लगभग 6 किमी है, इसकी यात्रा 3 से 3 घंटे में पूरी की जा सकती है, इसकी उचाई 12500 फ़ीट की है , पांच तरणि में पांच प्रकार की नदियों का संगम है .
  7. सातवां चरण – पंचतरणी से पवित्र गुफा की यात्रा 6 किमी है, और उचाई 13500 फ़ीट के आस -पास है, इसमें 3 किमी का रास्ता बर्फ से ढका  हुआ है, रस्ते में एक हिम नदी आती है जिसे पार करके पवित्र अमरनाथ गुफा के दर्शन होते है, 
Amarnath Yatra Map

श्री अमरनाथ गुफा 100 फ़ीट लम्बी और150 फ़ीट चौड़ी है,जिसमे अपने आप प्राकर्तिक रूप से निर्मित बर्फ से बना लगभग 10 फ़ीट ऊँचा शिवलिंग प्रकट होता है। बाई और माँ पार्वती और श्री गणेश जी का हिम निर्मित स्थान है। एक प्राचीन कथा के मुताबिक भगवान शंकर ने माँ पार्वती को अमर गुफा में संसार की रचना के गुड़ रहस्य की कथा सुनाई थी। उसी समय कबूतर (Amarnath Pigeons) का एक जोड़ा कथा को सुन रहा था और सुनकर अमर हो गया , आज भी कबूतर अमरनाथ दर्शनार्थियों को गुफा में दर्शन देते है।  

निष्कर्ष

भक्तों आज की पोस्ट में हमने आपको श्री अमरनाथ गुफा की यात्रा की बहुत ही उपयोगी जानकारी देने की कोशिश की है | आशा करते हैं आपको हमारी यह पोस्ट जरुर पसंद आई होगी | अगर आप या आपके रिश्तेदार या मित्र भी इस पवित्र यात्रा पर जाना चाहते हैं तो यह जानकारी आपके बहुत काम आ सकती है | इसीलिए इस उपयोगी पोस्ट को शेयर जरुर करें |

अगर आपके मन में भी श्री अमरनाथ गुफा यात्रा के सम्बन्ध में कोई सवाल तो हमें जरुर लिखें | और अगर अप किसी और यात्रा की जानकारी हमारे ब्लॉग यात्रा 99 में देखना चाहते हैं तो हमें कमेन्ट करें | हम जल्द से जल्द उस यात्रा की जानकारी यहाँ प्रकाशित करने की कोशिश करेंगे |

जय श्री राम | जय महाकाल

सौ० जितेन्द्र कुमार अरोरा

सपनो की यात्रा का आरंभ | Start Your Dream Yatra 99

हमारे देश में बहुत सारे लोग यात्रा करना पसंद करते हैं | और बचपन से ही सबको यात्रा करने का शौक होता है | क्योंकि हमारे देश में आस्था और धर्म पर बहुत विशवास किया जाता है | श्री वैष्णो देवीजी की यात्रा हो या बाबा अमरनाथ जी की या श्री केदार नाथ जी की यात्रा या शिर्डी बाबा की यात्रा हो या सिद्धिविनायक की यात्रा या फिर रामेश्वरम यात्रा हो या चार धाम यात्रा या कैलाश मानसरोवर यात्रा | इन सभी यात्राओं पर जाने के लिए लोग लालायित रहते हैं | बच्चों में भी इन यात्राओं के लिए बहुत उत्सुकता होती है | गर्मियों की छुट्टियों में तो बच्चों में बहुत अधिक उत्साह देखा जाता है | वह कहीं ना कहीं घूमने जाना चाहते हैं | माता पिता भी उन्हें ऐसी जगह ले जाना पसंद करते हैं जो धार्मिक भी हो और मनमोहक भी |

यात्रा को आसान बनायगा Yatra 99

हमें भी यात्रा करना बहुत अच्छा लगता है | इसीलिए हमने यह ब्लॉग yatra99.com बनाया है | हम अपने ब्लॉग में अपनी सभी यात्राओं की जानकारी देने की कोशिश करेंगे | जिससे आपको यात्रा करना आसान हो जाए | हम आपको अपने अनुभवों के आधार पर बतायंगे की आप कब और कैसे यात्रा करें | किस रस्ते से जाएँ | कहाँ कहाँ रुकें | कौनसे पर्यटन स्थान हैं जहाँ आप जा सकते है | इसके अतिरिक्त यात्रा पर जाने से पहले क्या क्या सामान अपने साथ ले जाएँ | यात्रा के दौरान क्या क्या सावधानियां रखें आदि |

देश विदेश के पर्यटन स्थलों की जानकारी यात्रा99 डॉट कॉम पर

इसके अतिरिक्त हम अपने ब्लॉग में देश विदेश के सभी महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की जानकारी देंगे जहाँ आप घूमने जा सकते हैं | हमारे देश में और विदेश में ऐसी बहुत सारी घूमने की जगह हैं जो आपका मन मोह सकती हैं | जैसे कश्मीर, शिमला, नैनीताल, मसूरी, अल्मोड़ा, रानीखेत, गोवा आदि | हम अपने ब्लॉग में इन सभी पर्यटन स्थलों की यात्रा के बारे में भी विस्तार से जानकारी देने की कोशिश करेंगे | जिससे आपकी यात्रा सुहानी हो जाए और आप अपने परिवार के साथ फुल एन्जॉय कर सकें |

यात्रा की जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें

अगर आपको भी किसी यात्रा की जानकारी हमारे ब्लॉग में चाहिए तो आप हमें जरुर संपर्क करें | हम जल्द से जल्द उस स्थान के बारे में पूरी जानकारी यहाँ पोस्ट करने की कोशिश करेंगे | आप हमसे मोबाइल नंबर, व्हाट्स अप नंबर, ईमेल एड्रेस, फेसबुक, instagram आदि पर संपर्क कर सकते हैं |

अगर आपको हमारा यह ब्लॉग yatra99.com पसंद आया होतो तो हमारे ब्लॉग को अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करेंगे |

जय हिन्द जय भारत