श्री कृष्ण के पावन जन्मभूमि मथुरा की यात्रा | Mathura Tourist Places in Hindi

जय श्री राम मित्रो | यात्रा 99 में आपका स्वागत है | आज की पोस्ट में हम आपको भगवान् श्री कृष्णा की जन्मभूमि मथुरा नगरी की यात्रा (Mathura Tourist Places in Hindi) की जानकारी देने जा रहे हैं | जैसा की आप जानते हैं की हम सब भारतवासी को जो एक दूसरे को बांधे कर रखता है | जो हमें मानवता का एहसास दिलाता है | जो एक मनुष्य के प्रति दूसरे मनुष्य के लिये सदभावना रखता हैं | जो हमे एक धर्म में रहकर मानवता की सीख देता है | वो है हिन्दू धर्म । और सब भारतीय वासी हिन्दू धर्म में भगवान को माना जाता है, उनकी पूजा की जाती है, उनके नाम का जाप किया जाता है | ताकि हमें मनुष्य के रूप से शांति से मोक्ष मिल सके।इसके लिये लोग भगवान के दर्शन करने उनके दरबार में जाते हैं । हमारे भारत  में  बहुत से ऐसी जगह हैं जहाँ लोग भगवान के दर्शन करने जाते है और वो है श्री कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा । आज हम आपको बतायेंगे की लोग क्यों मथुरा जाते हैं श्री कृष्णा के दर्शन के लिये। मथुरा जाने का सही समय (mathura temperature), मथुरा के आस पास देखे जाने वाले पौराणिक स्थल (mathura temples) आदि |

यात्रा का इतिहास | Mathura History in Hindi

उत्तर प्रदेश में यमुना नदी के किनारे बसी भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा की गणना मोक्ष देने वाली सात पीढ़ियों में करी गयी है |भगवान विष्णु ने इसे अपना सर्वाधिक प्रिय क्षेत्र बताया है | जिस प्रकार काशी में प्रमुख रूप से शिव की पूजा होती है | उसी प्रकार मथुरा भी विष्णु का पूजनीय स्थल है |  मथुरा के निकट ही मधुवन में पहले असु, मधु और लवण का शासन था | इसी मधू के नाम पर मधुर या मधुर्पूर या मधुवन नगरी बसी । ऐसा कहा जाता है की तीर्थ स्थल पर किया पाप अमृत होता है, परंतु इसके विपरीत ही मथुरा में किया पाप मथुरा में ही नष्ट हो जाता है और यही इस तीर्थ स्थल की महानता है ।

इस संबंध में निम्न दो कथायें प्रसिध्द है, मथुरा के निकट मधूवन में पहले असुर, मधू और लवण का शासन था | आसपास के क्षेत्र में इनका भारी उत्पात था | भगवान राम के छोटे भ्राता शत्रुघ्न ने लवण को मारकर इस नगरी को असुरों से मुक्त कराया । पुराणों में विधिवंस के इतिहास के अनुसार अन्धक की वंश्जा देवकी और विष्णु के वंशज वासुदेव से जिनका पुत्र हुआ वो नारायण के अवतार भगवान श्री कृष्ण थे | तथा इसीलिए इसे श्री कृष्ण के जन्मभूमि माना जाता है | मनु के पौत्र ध्रुव का जन्म इसी स्थल पर भगवत साक्षात्कार का तप करके हुआ था | मथुरा एक प्राचीन नगर है और इसकी मान्यताएं भी प्राचीन है आज भी यहाँ के घर और मंदिर प्राचीन सभ्यता से प्रेरित है |पर  वर्तमान में आधुनिकता के प्रभाव भी इस नगर में पड़ने लगा है मथुरा के द्वारिकाधीश मंदिर यमुनाघाट के समीप संकरे गलियों में मिष्ठान्न की दुकानें प्रसिध्द है। 

निधिवन का रहस्य क्या है | Mathura Nidhivan Information Hindi

भले ही बहुत से लोग मथुरा नही गये होंगे परंतु उन्होनें यहाँ के निधिवन के बारे में तो जरुर सुना ही होगा । निधिवन के अन्दर रंगमहल भी है | दावा होता है की हर सुबह रंगमहल को खोला जाता है तो वहाँ श्री कृष्ण के मौजूदगी के निशान मिलते हैं | दातुन, लडू, पान और एक लौठा पानी जिसे रंगमहल के अन्दर सात तालों के अन्दर बन्द कर दिया जाता है | मगर सुबह सब कुछ  बदला रहता है | दातुन चबा हुवा, लडू टूटे हूई, पान चबाय हुआ ,पानी भरा हुआ लौठा गिरा हुआ मिलता है | सौलह सिंगार में चूडि बिन्दिया सब बिखरी हुवी मिलती है । ऐसा माना जाता है की निधिवन के रहस्य को लेकर वहाँ के लोग सब जागरुक है, इसलिये शाम होते ही सब लोग अपने घर चले जाते है | यहाँ तक की वहाँ पर एक परिंदा तक भी नही बैठता उस वन में | आसपास के लोग शाम के वक़्त अपने खिडक़ी दरवाजे सब बन्द कर देते है ताकि उनकी नजर गलती से भी उस वन में ना पड़े। क्युकि ऐसा बोला जाता है की उस निधिवन में श्री कृष्ण अपनी गोपियों के संग रात को रास लीला रचाते हैं ।और आज तक उनके इस रास लीला को देखने के लिये रात को जो भी  चोरी छुपे रुका है वे सब सुबह अपनी सुद्बूध खो बैठता है और 2 या 4 दिन में ही मुस्कुरा कर अपने प्राण त्याग देता है। 

मथुरा यात्रा करने ने का सही समय | Mathura Weather for Travel | Mathura Weather

अगर आप भी श्री कृष्ण के दर्शन करना चाहते है सोच रहे है की किस समय अच्छा रहेगा मथुरा जाना तो हम आपको बता दे की मथुरा जाने का सही समय है फरवरी-मार्च और सितंबर-नवंबर के बीच होता है इस समय आपको ज्यादा गर्मी और कडाके ठंड को झेलना नही पड़ेगा। 

यात्रा में जाने के लिये स्वास्थ्य का ध्यान ?

यात्रा में जाने से पहले आप ये जरुर ध्यान रखे की अगर आप किसी भी तरह की दवाईया खाते है तो यात्रा में जाने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह जरुर करे।और साथ में दवाईया लेकर जाये। 

यात्रा के लिये सबसे अच्छा मार्ग?

श्री कृष्ण की जन्मभूमि मंदिर मथुरा शहर के बीचों –बीच में स्थित है यह मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन से सिर्फ 4 किमी के दूरी पर है मथुरा आप बस, कार या रिक्शा के जरिये आसानी से पहुँचा जा सकता है। 

मथुरा में जाने के लिये होटल/धर्मशाला/होम स्टे | Mathura Hotels

आपको मथुरा में रहने के लिये 800 से 1200 रुपय प्रति दिन के लिये कमरा मिल जाएगा परंतु अगर आप जाने से पहले बुक कर लेते है तो आपको कमरा निश्चित हो जाएगा। 

मथुरा में आस पास के पर्यटन स्थल | Mathura Tourist Places in Hindi | Mathura Temple

मथुरा में आपको भगवान के दर्शन उनसे जुड़ी आस्था और धर्म का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।अगर आप मथुरा जायें तो अपने सुविधा के अनुसार इन जगह पर भी घुमने जायें ।

1. कृष्ण जन्मभूमि मंदिर

2. द्वारकदीश मंदिर

3. गोवर्धन पर्वत

4. बाँके बिहारी मंदिर

5. कुसुम सरोवर

6. मथुरा संग्रहालय 

7. विश्राम घाट 

8. बिड़ला मंदिर

9. कंस किला

10. जय गुरुदेव मंदिर

11. पोटारा कुंड 

12. राधा कुंड

13. रंग भूमि 


यात्रा की तैयारी  कैसे करे ?

यात्रा करने के लिये आपको 2 या 4 दिन का समय लग भी सकता है | इसके लिये आपको अपने साथ वो सभी जरुरत की चीजें लेकर जाना पड़ेगा | जो आपको रोज चाहिये होता है | आप अपने सुविधा अनुसार ट्रिप तय कर सकते है | अगर आप खुद के वाहन से जाना चाहते है तो बहुत अच्छा है परंतु आपके पास खुद का वाहन नही है तो आप यात्रा पर सुविधा अनुसार रिक्शा,आटो आदि की मदद ले सकते हो।


यात्रा ऑनलाइन पंजीकरण ?

अगर आप भी श्री कृष्ण के दर्शन करना चाहते हो तो कोरोना के चलते आपको भी नियमों का पालन करना पड़ेगा । और ऑनलाइन पंजीकरण करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही आपको करोना का टीकाकरण करना अनिवार्य होगा और आपको सभी नियमों का पालन भी करना होगा।तथा मास्क और सेनिटाइज़र भी साथ लेकर जाये और जहाँ ज्यादा भीड़ हो वहाँ से दूरी बनाये रखे। 

यात्रा के दौरान सावधानियाँ ?

यात्रा के दौरान अपनी चीज़ो का ध्यान रखे और किसी भी अंजान व्यक्ति से किसी भी तरह की चीजें ना ले।और हो सके तो अपने समान की खुद ही जिम्मेदारी ले किसी के भरोसे ना रहे।

निष्कर्ष

मित्रों आज हमने आपको श्री कृष्णा जी की जन्मभूमि मथुरा की यात्रा के सम्बन्ध में बताया है | आशा करते हैं की आपको हमारी ये रोचक जानकारी जरुर पसंद आई होगी | अगर आपके मन में अभी भी कोई सवाल हो तो हमें जरुर लिखें | और इस पोस्ट को अपने मित्रो के साथ सोशल मीडिया पर जरुर शेयर करें |

हम अपने ब्लॉग यात्रा 99 डॉट कॉम में ऐसी ही धार्मिक और पर्यटन सम्बन्धी जानकारी पोस्ट करते रहते हैं इसीलिए हमें सब्सक्राइब जरुर करें और हमारे सोशल मडिया प्लेटफार्म फॉलो करें |

जय श्री राम

FAQ

1. मथुरा से महत्वपूर्ण स्थलों की दूरी | mathura to vrindavan distance

स्थान दूरी समय
वृन्दावन (Mathura Vrindavan)
Mathura to Vrindavan Distance
15.1 km via NH19/NH 4427 min
दिल्ली से मथुरा
Delhi to Mathura Distance
183.0 km via Yamuna Expy3 hr 18 min 
आगरा से मथुरा की दूरी
Agra to Mathura Distance
 56.7 km via NH19/NH 441 hr 17 min
जयपुर से मथुरा की दूरी
Jaipur to Mathura Distance
222.1 km via NH214 hr 14 min 

2. Mathura PIN Code

281001

माता वैष्णो देवी यात्रा कैसे करें | Mata Vaishno Devi Yatra Kaise Kare

सनातन धर्म में तीर्थ यात्रा की बड़ी मान्यता है। भारत चारों ओर से तीर्थों से ही घिरा देश है। एवं सभी तीर्थों की अपनी-अपनी मान्यता एवं महत्व हैं। उन्हीं में से एक तीर्थ है देवी वैष्णो के धाम की यात्रा। दुनिया भर के सभी सनातनी वैष्णो देवी की यात्रा को लेकर उत्सुक एवं जिज्ञासु होते हैं। तथा अवसर मिलने पर मां के द्वार जाने का सौभाग्य भी प्राप्त कर ही लेते हैं। लेकिन किसी भी यात्रा को करने के लिए उसके विषय में पूर्ण जानकारी होनी अत्यंत आवश्यक है। खासकर वैष्णो देवी की यात्रा अत्यंत ही दुर्गम होने के साथ मनोहारी एवं आनंद पूर्ण होता है। तो आज के इस लेख में हम जानेंगे हिंदू धर्म के इस महान तीर्थ वैष्णो देवी की यात्रा के विषय में। जिससे कि यदि आप भी यह यात्रा करने वाले हैं तो आपको इसके विषय में पूर्ण अनुभव प्राप्त हो जाए। एवं किसी प्रकार की परेशानी ना उठानी पड़े। तो आइए जानकारियों का यह सिलसिला प्रारंभ करते हैं।

माता वैष्णो देवी की यात्रा का परिचय | Vaishno Devi Temple Introduction | वैष्णो देवी की चढ़ाई कितनी है

माता भगवती श्री वैष्णो देवी [Jag Janani Maa Vaishno Devi] का मंदिर जम्मू कश्मीर में स्थित कटरा नाम के एक नगर से अनुमानतः 12 किलोमीटर दूरी पर त्रिकूट पर्वत पर स्थित है। एवं देवी माता त्रिकूट पर्वत पर लगभग 5200 फीट की ऊंचाई पर मंदिर में विराजमान हैं। जम्मू क्षेत्र का सर्वाधिक सम्मानित एवं मान्यता प्राप्त यह‌ मंदिर है। यहां मां को अलग-अलग नामों से पुकारते हैं भक्त कोई त्रिकुटा माता तो कोई वैष्णो देवी तथा कोई माता रानी के नाम से पुकारते हैं। भगवान वेंकटेश्वर के पश्चात वैष्णो देवी का ही यह मंदिर आता है जिसके दर्शन करने सर्वाधिक मात्रा में दूर-दूर से भक्त जन आते हैं। माता के प्रहरी के रूप में साक्षात श्री हनुमंत लाल विराजमान हैं। तथा यहीं माता के परम भक्त श्री भैरवनाथ का भी मंदिर है। जिनकी पूजा प्रथम में करने के पश्चात माता की पूजा की जाती है। मंदिर का संचालन सही ढंग से करने हेतु श्री माता वैष्णो देवी तीर्थ मंडल नाम की संस्था तत्पर रहती है।

माता वैष्णो देवी की गुफा दुनियांभर में बहुत प्रसिद्ध है |

क्या है वैष्णो देवी का इतिहास | Hitory of Maa Vaishno Devi Mandir

देवी वैष्णो से जुड़ी एक प्राचीन कथा जिसकी हिंदू धर्म में काफी मान्यता है। देवी के अवतार से जुड़ी इस कथा को आइये संक्षिप्त में जानते हैं।रत्नाकर नाम के एक बड़े ही सदकर्मी एवं धार्मिक राजा थे। किंतु दुर्भाग्यवश उनके कोई संतान नहीं थी वे राजा एवं रानी देवी के भक्त थे। देवी ने उन पर कृपा कर दी एवं स्वयं ही उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। जिस पुत्री का नाम त्रिकुटा रखा गया। इन्हें तीनों देवियों देवी दुर्गा, देवी लक्ष्मी, एवं देवी सरस्वती का सम्मिलित रूप माना जाता है। मान्यता है कि त्रिकुटा इन्हीं तीन देवियों का सम्मिलित अंश है। त्रिकुटा के जन्म से पूर्व ही उसके माता-पिता से देवी ने स्वप्न में यह वचन ले लिया था कि वह अपनी पुत्री को कोई भी कार्य करने से नहीं रोकेंगे। एवं उनके जन्म लेने का उद्देश्य पूर्ण होने में बाधा नहीं बनेंगे। तथा आगे चलकर उन्हीं त्रिकुटा का नाम वैष्णवी पड़ा। वैष्णवी ने मात्र 9 वर्ष की आयु में ही अपने माता-पिता से तपस्या करने की आज्ञा मांगी। एवं माता पिता वचनबद्ध होने के कारण ना चाहते हुए भी उन्हें तप करने की आज्ञा देते हैं। एवं जब श्री राम लक्ष्मण पूरी वानर सेना के साथ सीता की खोज करते हुए उन्हीं गुफाओं से होकर गुजरते हैं तो भगवान राम की दृष्टि देवी वैष्णवी पर पड़ती है। एवं वे उनसे उनके तप करने का कारण पूछते हैं तथा वरदान मांगने को कहते हैं। तब देवी वैष्णवी ने भगवान राम को अपनी तपस्या का प्रयोजन बताया कि वह उन्हें अपने वर के रूप में प्राप्त करना चाहती हैं तथा वे उनकी यह प्रार्थना स्वीकार करें। किंतु भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम एवं एक पत्नी व्रत धारण किए होने के कारण उनकी प्रार्थना स्वीकार नहीं करते। एवं उन्हें कलयुग तक प्रतीक्षा करने की आज्ञा देते हैं। एवं यह वचन देते हैं कि कलयुग में जब वे कल्कि अवतार धारण करेंगे तो देवी वैष्णवी की इच्छा को पूर्ण करेंगे तब तक के लिए उन्हें उत्तर भारत के पर्वत श्रृंखलाओं पर निवास करने एवं अनेकों अनेक भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए विराजमान होने को कहा। देवी त्रिकुटा के उस पर्वत पर निवास करने के कारण पर्वत का नाम त्रिकूट पर्वत पड़ा। एवं सीता हरण की सूचना देवी वैष्णवी को पड़ने पर उन्होंने भगवान राम के विजय के लिए 9 दिनों तक मां दुर्गा के नौवों स्वरूपों की आराधना करती हैं। इसी कारण नवरात्रि के इन 9 दिनों में जगह जगह रामायण पाठ एवं रामलीला का आयोजन होता है। तथा देवी के व्रत की सफलता के साथ दसवें दिन दशहरा का त्योहार मनाया जाता है। जोकि देवी वैष्णवी की मनोकामना की सफलता का सूचक है। इस दशहरे में भगवान राम की विजय एवं दशानन लंकेश की हार का आनंद मनाया जाता है।

वैष्णो देवी की यात्रा पर जाने का उचित समय कब है | Vaishno Devi Kapat Open | How to Visit Vaishno Devi

देवी के धाम की यात्रा के लिए सबसे सुविधाजनक समय गर्मियों का होता है। इस वक्त पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम अनुकूल रहता है। जबकि ठंडे या बरसात के मौसम में जाने पर प्रतिकूल मौसम का भी सामना करना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त गर्मी की छुट्टियों में अथवा देवी से जुड़े किसी त्योहार आदि में नवरात्रों में। यहां भक्तों ज्यादा भीड़ लगती है इसी कारण दर्शन की बारी आने में भी देर होती है।

मौसम के अनुसार करें तैयारी | Shri Mata Vaishno Devi Weather | Temperature in Vaishno Devi

जिस मौसम में यात्रा पर जा रहे हो उस मौसम के अनुकूल अपनी पैकिंग अवश्य कर लें। जिससे कि आपको परेशानी ना हो ठंड में जा रहे हो तो गर्म कपड़े आराम देय जूते साॅल दस्ताने इत्यादि।एवं गर्मियों में जा रहे हो तो हलके वस्त्र लेकर जाना उचित है। एवं मानसून के समय में इस यात्रा को करने वालों को अपने साथ छाता तथा बरसाती कपड़े (रेनकोट) साथ ले जाने चाहिए।

क्या-क्या व्यवस्थाएं प्राप्त हो सकती है वहां तक पहुंचने के पश्चात:-

भवन अथवा मुख्य परिसर में पहुंचने के पश्चात वहां किराए पर अथवा निशुल्क रहने की व्यवस्था प्राप्त हो जाएगी। तथा अपने सामान इत्यादि रखने हेतु क्लॉक रूम, चिकित्सा के लिए चिकित्सालय, एवं भोजन हेतु शाकाहारी रेस्टोरेंट भी मौजूद है। इसके अतिरिक्त प्रसाद एवं कुछ स्मृति चिन्ह बेचने वाली दुकानें भी मौजूद है।

यात्रा के लिए स्वास्थ्य अच्छा होना आवश्यक है |

यूं तो इस यात्रा को करने हेतु किसी विशेष स्वास्थ्य सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं। किंतु फिर भी क्योंकि यह धाम काफी ऊंचाई पर है। एवं इसे स्वस्थ एवं पुष्ट व्यक्ति ही कर पाने में सक्षम हो सकते हैं। अतः यह ख्याल रखें कि ह्रदय रोग, रक्तचाप संबंधी समस्या, सिर दर्द सिर का घूमना, सांस फूलना इत्यादि जैसी समस्या ना हो। अथवा कई बार ऐसी छोटी समस्याएं ऊंचाई व अधिक गर्मी के कारण भी हो जाती हैं। ऐसे में आपको यही सलाह दी जाती है कि जरा ठहर ठहर कर अपनी यात्रा पूर्ण करें। तथा पर्याप्त मात्रा में समय-समय पर भोजन पानी ग्रहण करते रहे।

वैष्णो देवी यात्रा के लिए सुगम मार्ग | Way of Vaishno Devi Mata Temple | Yatra Kaise Karen

दिल्ली के अतिरिक्त अन्य कई राज्यों के शहरों से भी जम्मू के कटरा तक डायरेक्ट ट्रेन चलती है। आप अपने नजदीकी शहर से कटरा तक की यात्रा ट्रेन से कर सकते हैं। उसके पश्चात कटरा से आप अपनी सुविधा के अनुसार कोई व्यवस्था करके त्रिकूट पर्वत तक पहुंच सकते हैं। अपनी इच्छा होने पर कटरा से मां के पहाड़ियों [katra to vaishno devi] तक पैदल भी जा सकते हैं।

कोरोनावायरस से त्रस्त होने पर भारत के प्रायः सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए थे। एवं यात्राएं रोक दी गई थी। क्यों कि चूंकि अब स्थिति में सुधार आ चुका है। तो यह यात्राएं पुनः प्रारंभ कर दी गई है। एवं इसी के अनुसार वैष्णो देवी द्वार खुल गए हैं। एवं भक्तों के लिए यात्रा भी प्रारंभ हो चुकी है 2021 नवरात्रि प्रारंभ होने के कारण। भक्तों की सुविधाओं का ख्याल रखते हुए सेवाएं और बढ़ा दी गई हैं।

वैष्णो देवी यात्रा के लिए तैयारी कैसे करें | How to Travel Vaishno Devi

यदि देवी के धाम की यात्रा करने की लिए आप भी उत्सुक हैं। तो इसके लिए पूर्ण तैयारी अवश्य कर लें। सर्वप्रथम तो अपनी टिकट बुकिंग समय पर करवा लें। इसके पश्चात मौसम के अनुरूप वस्त्र इत्यादि की पूर्ण व्यवस्था अपने साथ ही लेकर जाएं। एवं क्योंकि परिसर तक पहुंचने के पश्चात आपको व्यवस्थाएं प्राप्त हो सकेंगी खाने पीने की। इससे पूर्व के लिए आपको अपने साथ उचित मात्रा में कुछ भोजन पानी की व्यवस्था भी लेकर चलनी चाहिए। एवं यात्रा काफी दुर्गम है जितना संभव हो सके कुछ संगी साथियों के साथ ही इस यात्रा को पूर्ण करना चाहिए। जिससे कि सभी एक दूसरे का ख्याल रखते हुए। एक दूसरे का हौसला बढ़ाते हुए इस कठिन यात्रा को सरलता से पूर्ण कर सकें।

माता वैष्णो देवी टेम्परेचर | Mata Vaishno Devi Temperature

हम सभी जानते हैं की माता देवी जी के दर्शन करने के लिए हमें पहाड़ों से होकर जाना होता है | और पहाड़ों का मौसम बहुत अलग होता है | यहाँ कभी भी तेज़ बारिश हो जाती है और कभी भी घने बदल छा जाते हैं और कभी भी तेज हवाएं चलने लगती हैं | इसीलिए जब भी आपको माता के दर्शन करने जाना है तो आपको मौसम की जानकारी (vaishnodevi temperature) जरुर होनी चाहिए |

वैसे तो माता का दरबार पूरे वर्ष खुला रहता है | लेकिन गर्मियों के मौसम में जाना अच्छा रहता है | आप फरवरी महीने से अक्टूबर महीने के बीच कभी भी अपनी यात्रा कर सकते हैं | लेकिन आपको बरसात के मौसम में जाना चाहते हैं तो आपको बहुत सावधानी बरतनी होती है | क्योंकि बरसातों में पहाड़ों के खिसकने कर भय लगा रहता है | और एक बात आपको ध्यान रखनी चाहिए की आप कभी भी माता वैष्णो देवी जी के दर्शन करने जाएँ अपने साथ गर्म कपडे, टोपी, कम्बल, रेन कोट आदि जरुर लेकर जाएँ | क्योंकि वहां का मौसम हमेशा बदलता रहता है |

माता वैष्णो देवी आरती लाइव कैसे देखें | vaishno devi aarti live from bhawan today

अगर आप वैष्णो देवी जी की आरती लाइव देखना चाहते हैं तो आप इन्टरनेट की सहायता से अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर इनके दर्शन कर सकते हैं | लाइव आरती देखने के लिए यहाँ क्लिक करें |